---Advertisement---

2030 तक भारत में फेफड़ों का कैंसर बनेगा बड़ा खतरा, नॉन-स्मोकर्स और महिलाएं भी हाई रिस्क में

---Advertisement---

2030 तक भारत में फेफड़ों का कैंसर बनेगा बड़ा खतरा, नॉन-स्मोकर्स और महिलाएं भी हाई रिस्क में

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट में खुलासा, देश में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में तेज उछाल की आशंका, पूर्वोत्तर सबसे ज्यादा प्रभावित

2030 India lung cancer study alarming prediction | क्या आपको लगता है कि सिगरेट या तंबाकू से दूर रहने पर फेफड़ों का कैंसर आपको नहीं हो सकता? अगर हां, तो यह रिपोर्ट आपकी चिंता बढ़ा सकती है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (IJMR) में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन ने भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2030 तक देश में फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) के मामलों में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह बीमारी अब सिर्फ धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं रही। महिलाएं और नॉन-स्मोकर्स भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण और घरेलू ईंधन का उपयोग इसके पीछे बड़ी वजह बन रहा है।

पूर्वोत्तर भारत पर सबसे ज्यादा खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर का सबसे ज्यादा बोझ भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में देखा गया है। आइजोल में कैंसर की दर देश में सबसे अधिक पाई गई। यहां महिलाओं में कैंसर की दर पुरुषों के लगभग बराबर पहुंच चुकी है, जो भारत के लिए असामान्य माना जा रहा है।
पूर्वोत्तर में तंबाकू का सेवन भी काफी अधिक है—पुरुषों में 68% और महिलाओं में 54%, जो इस बीमारी का बड़ा कारण बन रहा है।

नॉन-स्मोकर्स क्यों हो रहे हैं शिकार?

अध्ययन में सामने आया है कि बिना धूम्रपान करने वाली महिलाओं में भी फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण बताए गए हैं—

  • घर के अंदर वायु प्रदूषण

  • खाना पकाने में बायोमास ईंधन (लकड़ी, उपले) का इस्तेमाल

  • सेकेंड-हैंड स्मोक

  • कार्यस्थलों पर प्रदूषण का संपर्क

कैंसर का बदलता स्वरूप

देशभर में फेफड़ों के कैंसर के प्रकार में भी बदलाव देखा गया है। पहले जहां स्क्वैमस-सेल कार्सिनोमा के मामले ज्यादा थे, अब उसकी जगह एडेनोकार्सिनोमा तेजी से बढ़ रहा है।

  • बेंगलुरु में महिलाओं के आधे से अधिक मामलों में एडेनोकार्सिनोमा पाया गया।

  • दिल्ली में लार्ज-सेल कार्सिनोमा के मामलों में तेज वृद्धि दर्ज की गई।

उत्तर और दक्षिण भारत की स्थिति

दक्षिण भारत के कुछ जिलों—कन्नूर, कासरगोड और कोल्लम—में तंबाकू और शराब का कम सेवन होने के बावजूद पुरुषों में कैंसर की दर अधिक है, जिससे यह संकेत मिलता है कि तंबाकू के अलावा अन्य जोखिम कारक भी सक्रिय हैं।
उत्तर भारत में श्रीनगर में पुरुषों में कैंसर की दर ज्यादा पाई गई, जबकि कम नशीले पदार्थों के उपयोग के बावजूद महिलाओं में भी मामले बढ़े हैं।

महिलाओं में ज्यादा तेज बढ़ोतरी

आंकड़ों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर के मामले सालाना 6.7% की दर से बढ़ रहे हैं, जबकि पुरुषों में यह दर 4.3% है। तिरुवनंतपुरम में महिलाओं और डिंडीगुल में पुरुषों के मामलों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

2030 की डरावनी तस्वीर

अनुमान है कि 2030 तक केरल के कुछ हिस्सों में पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर की दर प्रति लाख आबादी पर 33 से अधिक हो सकती है, जबकि बेंगलुरु जैसे शहरों में महिलाओं में यह आंकड़ा 8 प्रति लाख तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि कई इलाकों में मौतों की सही रिपोर्टिंग नहीं हो रही, जिससे बीमारी की वास्तविक गंभीरता का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है।


यह भी पढ़ें….
एक जिला सहकारी बैंक और 3 NBFC पर लाखों का जुर्माना, 35 NBFC का लाइसेंस रद्द – आपके अकाउंट पर क्या असर?

Join WhatsApp

Join Now

---Advertisement---

Leave a Comment