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लोकसभा हंगामा राहुल गांधी विवाद कांग्रेस के 8 सांसद निलंबित पूर्व सेना प्रमुख की किताब से मचा बवाल

लोकसभा हंगामा राहुल गांधी विवाद कांग्रेस के 8 सांसद निलंबित पूर्व सेना प्रमुख की किताब से मचा बवाल
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आज हम संसद से जुड़ी एक बड़ी और संवेदनशील खबर पर बात कर रहे हैं जिसने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। लोकसभा में लगातार दो दिन तक चले हंगामे के बाद कांग्रेस के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। यह पूरा विवाद पूर्व थल सेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब और उस पर राहुल गांधी के बयान से जुड़ा हुआ है।

पूर्व सेना प्रमुख की किताब बनी विवाद की जड़

लोकसभा में हंगामे की शुरुआत उस समय हुई जब राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित संस्मरण का हवाला दिया। यह संस्मरण भारत चीन के बीच वर्ष 2020 में हुए सैन्य टकराव से जुड़ा बताया गया। एक पत्रिका में छपे लेख में यह संकेत दिया गया था कि उस समय राजनीतिक नेतृत्व निर्णायक नहीं था। यही बात सत्ता पक्ष को आपत्तिजनक लगी।

दो दिन तक संसद में टकराव

लगातार दो दिनों तक लोकसभा में तीखी बहस और शोर शराबा देखने को मिला। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने साफ कहा कि बिना अनुमति और बिना प्रक्रिया के किसी भी दस्तावेज का हवाला सदन में नहीं दिया जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी सांसद को किसी अन्य सांसद या नेतृत्व पर आरोप लगाना है तो पहले नोटिस देना जरूरी होता है। इसके बावजूद राहुल गांधी अपने बयान पर अड़े रहे।

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8 सांसद निलंबित ,कांग्रेस सांसदों पर गिरी गाज

मंगलवार को स्थिति और बिगड़ गई जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने अनुशासनहीन व्यवहार के आरोप में कांग्रेस के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया। निलंबित सांसदों में मणिकम टैगोर और किरण रेड्डी और प्रशांत पाडोले और हिबी ईडन और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और गुरजीत औजला और एस वेंकट रमन और डीन कुरियाकोस शामिल हैं। इस कार्रवाई से विपक्ष में नाराजगी और बढ़ गई।

संसद परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन

निलंबन के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने संसद भवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश बताया। उनका कहना है कि देश से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है।

स्पीकर की चेतावनी और सख्त रुख

लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अध्यक्ष का फैसला अंतिम होता है। उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि कुछ सांसदों द्वारा आसन को असंसदीय शब्दों से संबोधित किया गया। इस पर सत्ता पक्ष के नेता कृष्ण प्रसाद तेनेटी ने विपक्ष को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि यह संसद है कोई निजी बातचीत की जगह नहीं।

आगे क्या होगा राजनीतिक माहौल गर्म

इस पूरे घटनाक्रम के बाद संसद का माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है। विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा बता रहा है जबकि सत्ता पक्ष अनुशासन और नियमों की बात कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

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