भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुई अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया, समीकरण पलटे
सुसनेर (आगर–मालवा)। नगर परिषद सुसनेर की सियासत ने शनिवार को दोपहर कांग्रेस निर्दली सहित भाजपा के 12 पार्षदों ने प्रेस वार्ता कर विश्वास प्रस्ताव लाने पर की थी प्रेस वार्ता ,शाम तक 12 ही पार्षदों के सामूहिक तस्वीर भी सजा सोशल मीडिया पर की गई,कई करवटें बदल दीं। फिर रविवार की सुबह दिन की शुरुआत आरोप–प्रत्यारोप और बैठकों से हुई, तो दोपहर होते–होते भाजपा की नगर परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया ने औपचारिक रूप से कांग्रेस का दामन थाम लिया। इस कदम से परिषद के भीतर बहुमत के समीकरण बदलते दिखे और दोनों दलों के दावों में अचानक तेज़ी आ गई।
बड़ी बातें
भाजपा की नगर परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया ने कांग्रेस जॉइन की—कांग्रेस खेमे में उत्साह, भाजपा में हलचल।
परिषद में पहले से चल रहे बगावत/अविश्वास के सियासी थपेड़ों के बीच घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया।
सुबह से शाम तक—हर पल बदली तस्वीर
सुबह:
परिषद से जुड़े पार्षदों और पदाधिकारियों की श्रृंखलाबद्ध बैठकों का दौर शुरू हुआ। विरोधी गुट ने परिषद संचालन में अनियमितताओं के आरोप दोहराए और समर्थन/हस्ताक्षर जुटाने में जोर लगाया। प्रशासनिक दफ्तरों में हलचल बढ़ी—कौन किसके साथ है, यही दिन का बड़ा सवाल बना रहा।
दोपहर:
विधायक भेरू सिंह परिहार बापू ने कांग्रेस के पार्षदों के साथ प्रेस वार्ता कर भाजपा नगर परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया को कांग्रेस का दुपट्टा पहन कर कांग्रेस पार्टी में स्वागत किया और कांग्रेस के सदस्यता ग्रहण करवाई।
शाम:
नाटकीय मोड़—नगर परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया कांग्रेस में शामिल हो गईं। पार्टी स्कार्फ पहनाकर स्वागत किया गया। जॉइनिंग के साथ ही भाजपा ने इसे “राजनीतिक अवसरवाद” बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया और कहा कि “अंतिम फैसला सदन/विधिक प्रक्रिया में होगा।”
किसने क्या कहा (संक्षेप)
लक्ष्मी राहुल सिसोदिया (नई पारी): “मैं विकास और समन्वय की राजनीति में विश्वास करती हूँ। जो काम रुके थे, उन्हें सहमति से आगे बढ़ाना चाहती हूँ—इसी सोच के साथ कांग्रेस में आई हूँ।”
कांग्रेस नेतागण: “यह शहर के जनादेश और पार्षदों की मौजूदा भावना का प्रतिबिंब है। परिषद में अब स्थिरता आएगी, वह स्वतंत्रता के साथ परिषद अध्यक्ष काम करेगी।”
भाजपा पदाधिकारी: “जनता ने हमारा बोर्ड चुना था। राजनीतिक दबाव बनाकर समीकरण पलटने की कोशिश हो रही है—हम प्रक्रिया में अपनी बात मज़बूती से रखेंगे।”
पृष्ठभूमि
बीते दिनों परिषद में आरोप–प्रत्यारोप, अविश्वास की सुगबुगाहट, और पार्षदों की बगावत जैसी स्थितियाँ बनीं। आज की ज्वॉइनिंग ने इस खींचतान को नया आयाम दे दिया है।
आगे क्या?
अविश्वास/विश्वास प्रस्ताव की स्थिति: यदि नोटिस लंबित है तो अगला पड़ाव सदन में परीक्षण हो सकता है।
समितियों व कामकाज पर असर: बोर्ड की संरचना स्पष्ट होते ही स्थायी/निर्माण समितियों में फेरबदल संभव, लंबित कार्यों की प्राथमिकता तय होगी।
फोटो स्टोरी का सार
दिनभर की बैठकों, हाथ उठाकर शक्ति–प्रदर्शन, प्रेस ब्रीफिंग और शाम की ज्वॉइनिंग—हर फ्रेम में बदलते समीकरण साफ़ दिखे। यही वजह रही कि सुसनेर में आज सुबह–शाम का फ़ासला ही पूरी कहानी बन गया।
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