50 की उम्र के बाद इंटरमिटेंट फास्टिंग: स्वस्थ जीवन के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स
Intermittent Fasting Tips for Women | 50 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, जैसे हार्मोनल असंतुलन, मेटाबॉलिज्म का धीमा होना, और ऊर्जा स्तर में कमी। ऐसे में इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) एक प्रभावी और लोकप्रिय तरीका हो सकता है वजन नियंत्रित करने, स्वास्थ्य सुधारने, और ऊर्जा बढ़ाने का। लेकिन इस उम्र में फास्टिंग को सावधानी और समझदारी के साथ अपनाना जरूरी है। लंबे समय तक भूखा रहना या अनुचित डाइट इस उम्र में नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए, सही दृष्टिकोण और विशेषज्ञों की सलाह के साथ इंटरमिटेंट फास्टिंग को अपनाने से यह आपकी सेहत के लिए वरदान साबित हो सकता है। इस लेख में, सेंट्रल गवर्नमेंट हॉस्पिटल के ईएसआईसी अस्पताल की डाइटीशियन रितु पुरी और अन्य विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर कुछ आसान और प्रभावी टिप्स दिए गए हैं, जो 50 की उम्र के बाद इंटरमिटेंट फास्टिंग को सुरक्षित और प्रभावी बनाएंगे। Intermittent Fasting Tips for Women
इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है और क्यों है जरूरी?
इंटरमिटेंट फास्टिंग (IF) एक खानपान का तरीका है, जिसमें खाने और उपवास (फास्टिंग) की अवधि को चक्रीय रूप से बांटा जाता है। यह डाइट न केवल वजन कम करने में मदद करती है, बल्कि मेटाबॉलिक स्वास्थ्य, हृदय स्वास्थ्य, और ब्लड शुगर नियंत्रण में भी सुधार लाती है। 50 की उम्र के बाद, जब मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और हार्मोनल बदलाव जैसे मेनोपॉज के प्रभाव सामने आते हैं, यह डाइट विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है। हालांकि, इस उम्र में शरीर की जरूरतें बदल जाती हैं, इसलिए फास्टिंग को सावधानीपूर्वक और वैज्ञानिक तरीके से अपनाना जरूरी है।
50 की उम्र में इंटरमिटेंट फास्टिंग के लिए टिप्स
1. छोटी फास्टिंग विंडो से करें शुरुआत
50 की उम्र में लंबे समय तक भूखा रहना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है, खासकर अगर आप पहली बार इंटरमिटेंट फास्टिंग कर रही हैं। डाइटीशियन रितु पुरी सलाह देती हैं कि शुरुआत में 12:12 विधि अपनाएं, जिसमें आप 12 घंटे खाने की अवधि (Eating Window) और 12 घंटे उपवास की अवधि रखें। उदाहरण के लिए:
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सुबह 7 बजे पहला भोजन लें।
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रात 7 बजे तक आखिरी भोजन पूरा करें।
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इसके बाद अगले दिन सुबह 7 बजे तक उपवास करें।
जब आप इस रूटीन में सहज हो जाएं, तो धीरे-धीरे फास्टिंग विंडो को 14:10 या 16:8 तक बढ़ा सकती हैं। छोटी फास्टिंग विंडो ब्लड शुगर को स्थिर रखती है, भूख की तलब (cravings) को कम करती है, और फास्टिंग को लंबे समय तक टिकाऊ बनाती है।
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2. पोषक तत्वों से भरपूर डाइट पर ध्यान दें
50 की उम्र के बाद शरीर में पोषक तत्वों की कमी, विशेष रूप से फाइबर, कैल्शियम, और विटामिन डी, स्वास्थ्य समस्याओं जैसे ऑस्टियोपोरोसिस, कब्ज, और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकती है। इसलिए, खाने की अवधि में पौष्टिक और संतुलित आहार लेना जरूरी है:
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फाइबर युक्त भोजन: रंग-बिरंगी सब्जियां (जैसे पालक, ब्रोकली, गाजर), सलाद, और साबुत अनाज (जैसे ओट्स, क्विनोआ) शामिल करें। फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है।
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कैल्शियम और विटामिन डी: हड्डियों की मजबूती के लिए दूध, दही, पनीर, बादाम, और हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं। सूरज की रोशनी से विटामिन डी प्राप्त करें।
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हेल्दी फैट्स: एवोकाडो, नट्स, और जैतून का तेल जैसे स्वस्थ वसा ऊर्जा स्तर को बनाए रखते हैं।
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प्रोटीन: दाल, छोले, अंडे, मछली, और लीन मीट प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं, जो मांसपेशियों को मजबूत रखते हैं।
3. दवाइयों के समय को करें समायोजित
50 की उम्र में कई महिलाएं उच्च रक्तचाप, थायराइड, या डायबिटीज जैसी बीमारियों के लिए दवाइयां लेती हैं। इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें और दवाइयों के समय को फास्टिंग विंडो के अनुसार समायोजित करें:
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थायराइड और बीपी की दवाइयां: इन्हें समय पर लें, भले ही फास्टिंग विंडो में हो। अगर जरूरी हो, तो डॉक्टर से पूछकर दवा का समय खाने की अवधि में शिफ्ट करें।
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नियमित स्वास्थ्य जांच: ब्लड शुगर, बीपी, और थायराइड लेवल की नियमित निगरानी करें ताकि फास्टिंग के प्रभाव का आकलन हो सके।
4. हाइड्रेशन का रखें विशेष ध्यान
50 की उम्र में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है, खासकर फास्टिंग के दौरान। उपवास की अवधि में पानी, नींबू पानी (बिना चीनी), नारियल पानी, या हर्बल टी पीएं। हाइड्रेशन न केवल ऊर्जा स्तर को बनाए रखता है, बल्कि भूख की तलब को भी कम करता है। डाइटीशियन रितु पुरी सुझाव देती हैं कि दिन में कम से कम 2-3 लीटर पानी जरूर पिएं।
5. पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन
मेनोपॉज के बाद नींद की कमी और तनाव हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकते हैं। इंटरमिटेंट फास्टिंग के साथ-साथ:
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रात में 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें।
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योग, मेडिटेशन, या गहरी सांस लेने की तकनीकों का अभ्यास करें।
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तनाव कम करने के लिए हल्की सैर या स्ट्रेचिंग व्यायाम करें।
6. हल्के व्यायाम को शामिल करें
50 की उम्र में भारी व्यायाम करने से जोड़ों और मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए, फास्टिंग के साथ हल्के व्यायाम जैसे वॉकिंग, योग, या स्ट्रेचिंग को शामिल करें। खाने की अवधि के बाद व्यायाम करने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और फास्टिंग के लाभ बढ़ते हैं।
7. धीरे-धीरे शुरू करें और सुनें अपने शरीर को
इंटरमिटेंट फास्टिंग को एकदम से सख्ती के साथ शुरू न करें। अपने शरीर की जरूरतों को समझें और धीरे-धीरे फास्टिंग की अवधि बढ़ाएं। अगर आपको चक्कर, कमजोरी, या अत्यधिक भूख महसूस हो, तो तुरंत खाने की अवधि शुरू करें और अपने डॉक्टर से सलाह लें।
अतिरिक्त सुझाव
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खाने का समय निर्धारित करें: खाने की अवधि में नियमित अंतराल पर छोटे-छोटे मील लें ताकि पोषण संतुलित रहे।
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प्रोसेस्ड फूड से बचें: चीनी, तले हुए खाद्य पदार्थ, और प्रोसेस्ड खाने से बचें, क्योंकि ये मेटाबॉलिज्म को और धीमा कर सकते हैं।
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सप्लीमेंट्स पर विचार करें: अगर जरूरी हो, तो डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी, ओमेगा-3, या मल्टीविटामिन सप्लीमेंट लें।
50 की उम्र के बाद इंटरमिटेंट फास्टिंग आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक शानदार तरीका हो सकता है, बशर्ते इसे सही तरीके से और विशेषज्ञ की सलाह के साथ अपनाया जाए। छोटी फास्टिंग विंडो, पौष्टिकआहार, हाइड्रेशन, और नियमित स्वास्थ्य निगरानी के साथ यह डाइट न केवल वजन नियंत्रण में मदद करती है, बल्कि ऊर्जा, हृदय स्वास्थ्य, और समग्र कल्याण को भी बढ़ावा देती है। अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और इस डाइट को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। Intermittent Fasting Tips for Women
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मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।