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स्टाम्प ड्यूटी में 100 से 400% तक की बढ़ोतरी, नोटिफिकेशन के साथ ही संपदा-2 सॉफ्टवेयर पर अपलोड

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स्टाम्प ड्यूटी में 100 से 400% तक की बढ़ोतरी, नोटिफिकेशन के साथ ही संपदा-2 सॉफ्टवेयर पर अपलोड

Ujjain news | उज्जैन, मध्य प्रदेश। राज्य सरकार ने स्टाम्प ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी का फैसला लागू कर दिया है, जिसके बाद उज्जैन सहित पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। गुरुवार, 11 सितंबर 2025 को गजट नोटिफिकेशन जारी होते ही इसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया और संपदा-2 सॉफ्टवेयर पर अपलोड भी कर दिया गया। इस फैसले से शपथ-पत्र से लेकर संपत्ति रजिस्ट्री तक कई दस्तावेजों की लागत में 100 से 400 फीसद तक की वृद्धि हो गई है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। Ujjain news

त्वरित कार्रवाई, तीखा विरोध

जैसे ही स्टाम्प ड्यूटी बढ़ाने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था, वकीलों, प्रॉपर्टी डीलरों और रियल एस्टेट कारोबारियों ने इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया था। कई संगठनों ने ज्ञापन सौंपे और मांग की थी कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। एक वकील ने तो इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। इसके बावजूद, सरकार ने न केवल प्रस्ताव को मंजूरी दी, बल्कि इसे रिकॉर्ड समय में लागू भी कर दिया। रजिस्ट्रार कार्यालयों को तत्काल प्रभाव से नए नियम लागू करने के आदेश दे दिए गए।

विरोध के बीच सरकार की इस जल्दबाजी ने कई सवाल खड़े किए हैं। आलोचकों का कहना है कि जब जनता के लिए रियायत की बात आती है, तो उसमें महीनों का समय लग जाता है, लेकिन स्टाम्प ड्यूटी बढ़ाने में सरकार ने अभूतपूर्व तेजी दिखाई। कुछ विशेषज्ञों ने इसे आम जनता की अनदेखी करने वाला कदम बताया है।

सरकार के दावे और विवाद

सरकार का दावा था कि स्टाम्प ड्यूटी में 2014 के बाद कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन कई दस्तावेज और सबूत बताते हैं कि इस दौरान कई बार शुल्क बढ़ाए गए हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि सरकार ने गलत जानकारी देकर इस बढ़ोतरी को मंजूरी दिलाई। एक तरफ केंद्र सरकार जीएसटी में रियायत देकर जनता को राहत देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार की यह नीति आम आदमी के लिए आर्थिक बोझ बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

किन दस्तावेजों पर कितनी बढ़ी स्टाम्प ड्यूटी?

नए नियमों के तहत कई दस्तावेजों की स्टाम्प ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी हुई है। नीचे प्रमुख दस्तावेजों और उनकी नई दरों की सूची दी गई है:

  • शपथ-पत्र: पहले ₹50, अब ₹200 (300% बढ़ोतरी)

  • अचल संपत्ति के लिए एग्रीमेंट (कब्जा रहित): पहले ₹1,000, अब ₹5,000 (400% बढ़ोतरी)

  • विकास, निर्माण या प्रतिभूति बांड के अलावा एग्रीमेंट (संविदा मूल्य ₹50 लाख तक): पहले ₹500, अब ₹1,000 (100% बढ़ोतरी)

  • सहमति विलेख: पहले ₹1,000, अब ₹5,000 (400% बढ़ोतरी)

  • रजिस्ट्री में सुधार: पहले ₹1,000, अब ₹5,000 (400% बढ़ोतरी)

  • रिवॉल्वर और पिस्टल लाइसेंस: पहले ₹5,000, अब ₹10,000; नवीनीकरण के लिए ₹2,000 से ₹5,000

  • पार्टनरशिप डीड: पहले ₹2,000, अब ₹5,000 (150% बढ़ोतरी)

  • पावर ऑफ अटॉर्नी (एकल लेनदेन): पहले ₹1,000, अब ₹2,000 (100% बढ़ोतरी); एक से अधिक लेनदेन के लिए ₹5,000

  • ट्रस्ट की संपत्ति: पहले ₹1,000, अब ₹5,000 (400% बढ़ोतरी)

आम जनता पर असर

इस बढ़ोतरी का असर न केवल प्रॉपर्टी डीलरों और रियल एस्टेट कारोबारियों पर पड़ेगा, बल्कि आम आदमी को भी दस्तावेजों के लिए ज्यादा खर्च करना होगा। शपथ-पत्र, रजिस्ट्री, और लाइसेंस जैसे रोजमर्रा के दस्तावेजों की लागत बढ़ने से लोगों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। खासकर मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों के लिए यह फैसला परेशानी का सबब बन सकता है।

भविष्य की संभावनाएं

विरोध और हाईकोर्ट में चल रही याचिका के बावजूद, सरकार ने इस फैसले को तुरंत लागू कर दिया है। अब यह देखना बाकी है कि क्या कोर्ट के फैसले या जनता के दबाव से इस बढ़ोतरी पर कोई राहत मिल पाएगी। फिलहाल, उज्जैन के रजिस्ट्रार कार्यालयों में नए नियम लागू हो चुके हैं, और लोग नई दरों के साथ दस्तावेजों की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं।

यह फैसला निश्चित रूप से उज्जैन और पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। आम जनता और कारोबारी समुदाय सरकार के इस कदम को लेकर असमंजस में हैं, और भविष्य में इसके और व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।


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