खजाना खाली! ₹60,000 करोड़ उड़ गए, RBI को बेचना पड़ा 35 टन सोना – टैरिफ या कर्ज का जाल?

खजाना खाली! ₹60,000 करोड़ उड़ गए, RBI को बेचना पड़ा 35 टन सोना – टैरिफ या कर्ज का जाल?

India Forex Reserves Crash 2025 RBI Sells 35 Ton Gold | 6 नवंबर 2025: वैश्विक व्यापार युद्धों की आहट और बाजारों की उथल-पुथल के बीच भारत की आर्थिक किलेबंदी में एक बड़ा झटका लगा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों ने एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है – 24 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) करीब 6.92 अरब डॉलर लुढ़ककर 695.36 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह गिरावट न केवल विदेशी मुद्रा संपत्तियों (एफसीए) में कमी से उपजी है, बल्कि सोने के भंडार के मूल्यांकन में भी 3.01 अरब डॉलर की तेज रफ्तार से कमी दर्ज की गई। हालांकि, सोने की बिक्री की अफवाहें भ्रामक साबित हुई हैं; वास्तव में यह मूल्यह्रास वैश्विक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का नतीजा है, न कि आरबीआई द्वारा कोई बिक्री।

पिछले सप्ताह की तुलना में यह गिरावट और भी चिंताजनक लगती है, जब रिजर्व में 4.50 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी और कुल भंडार 702.28 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे नए टैरिफ दबाव, चीन-अमेरिका व्यापार तनाव और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक अस्थिरता ने वैश्विक निर्यात श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत के डॉलर आयात पर पड़ा। लेकिन सवाल यह है – क्या यह अस्थायी उतार-चढ़ाव है, या भारत की आर्थिक स्थिरता पर लंबे समय तक असर डालने वाली चुनौती?

गिरावट के पीछे छिपे कारण: टैरिफ से तिजोरी तक का सफर

आरबीआई के साप्ताहिक सांख्यिकीय पूरक (डब्ल्यूएसएस) में विस्तृत ब्रेकडाउन से साफ होता है कि विदेशी मुद्रा संपत्तियां (एफसीए) – जो कुल रिजर्व का सबसे बड़ा हिस्सा हैं – 3.86 अरब डॉलर घटकर 566.55 अरब डॉलर रह गईं। यह कमी मुख्य रूप से आरबीआई के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप से जुड़ी है, जहां केंद्रीय बैंक ने रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए डॉलर बेचे। इसके अलावा, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में मामूली 58 मिलियन डॉलर की कमी और आईएमएफ के साथ आरक्षित स्थिति में 6 मिलियन डॉलर की गिरावट ने भी कुल आंकड़े को प्रभावित किया।

सोने के भंडार पर नजर डालें तो मूल्य 105.54 अरब डॉलर पर आ गया, जो पिछले सप्ताह के 108.55 अरब डॉलर से 3.01 अरब डॉलर कम है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि भारत के सोने के भौतिक भंडार में कोई कमी नहीं आई – कुल 808 मीट्रिक टन सोना अब भी सुरक्षित है। गिरावट का कारण वैश्विक सोने की कीमतों में अस्थायी गिरावट है, जो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियों और डॉलर की मजबूती से प्रभावित हुई। सोशल मीडिया पर सोने की ‘बिक्री’ की अफवाहें तेज हुईं, लेकिन आरबीआई ने स्पष्ट किया कि यह मात्र मूल्यांकन प्रभाव है। वास्तव में, 2025 में आरबीआई ने सोने के भंडार को मजबूत करने के लिए 65 टन से अधिक सोना खरीदा है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के खिलाफ एक रणनीतिक कदम है।

वैश्विक संदर्भ में देखें तो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की छाया और ट्रंप प्रशासन की संभावित टैरिफ नीतियां भारत के निर्यात को निशाना बना रही हैं। भारत का अमेरिका को निर्यात – मुख्य रूप से कपड़ा, दवाएं और आईटी सेवाएं – पहले ही 5-7% प्रभावित हो चुका है। ग्लोबल सप्लाई चेन में उथल-पुथल से आयात बिल बढ़ा है, खासकर कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी। अर्थशास्त्री डॉ. रघुराम राजन के अनुसार, “फॉरेक्स रिजर्व में उतार-चढ़ाव सामान्य है, लेकिन लगातार गिरावट करेंसी पर दबाव डाल सकती है।”

फॉरेक्स रिजर्व: अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा

किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा भंडार एक मजबूत ढाल की तरह होता है। यह न केवल आयात बिल चुकाने, विदेशी कर्ज का भुगतान और स्थानीय मुद्रा (रुपये) को स्थिर रखने में मदद करता है, बल्कि विदेशी निवेशकों का विश्वास भी जगाता है। उच्च रिजर्व शेयर बाजार को मजबूती देते हैं, निवेश आकर्षित करते हैं और समग्र आर्थिक वृद्धि को गति प्रदान करते हैं। उदाहरण के तौर पर, जब रिजर्व 700 अरब डॉलर के पार पहुंचे थे, तो सेंसेक्स में 2% की तेजी आई थी।

MP News

(व्हाट्सएप  ग्रुप से जुड़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें- https://whatsapp.com/channel/0029ValRqro5K3zMVUrxrl28)

दूसरी ओर, गिरावट के खतरे गंभीर हैं। रुपये पर दबाव बढ़ने से आयात महंगे हो जाते हैं – पेट्रोल, डीजल से लेकर मोबाइल फोन तक। महंगाई की आग भड़क सकती है, जो पहले से ही 5.5% पर है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि यह ट्रेंड जारी रहा, तो भारत को निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीतियां अपनानी पड़ेंगी, जैसे ‘मेक इन इंडिया’ को और मजबूत करना या एशियाई बाजारों पर फोकस शिफ्ट करना।

आगे की राह: सुधार के संकेत या चिंता की घंटी?

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने हालिया बयान में कहा, “हमारे रिजर्व अभी भी मजबूत हैं और 12 महीनों के आयात को कवर करने में सक्षम।” कुल मिलाकर, 2025 में अब तक रिजर्व में 46 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है, जो 2024 की तुलना में बेहतर है। लेकिन वैश्विक बादल छंटने तक सतर्कता बरतनी होगी। सरकार को निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं पर जोर देना चाहिए, जबकि आरबीआई बाजार हस्तक्षेप जारी रखेगा। क्या यह गिरावट एक अस्थायी धक्का है या आर्थिक तूफान की शुरुआत? समय ही बताएगा, लेकिन भारत की लचीलापन परीक्षा की घड़ी है।

(यह रिपोर्ट आरबीआई के आधिकारिक आंकड़ों और विशेषज्ञ विश्लेषण पर आधारित है। अधिक अपडेट के लिए rbi.org.in देखें।)


यह भी पढ़ें…
आज का राशिफल 6 नवंबर 2025: कर्क, कन्या और मकर राशि को मिलेगा विशेष लाभ

 

Leave a Comment

अहान पांडे कौन हैं? साउथ के मशहूर विलेन कोटा श्रीनिवास का निधन Kota Srinivasa Rao death news शर्मनाक जांच! ठाणे के स्कूल में छात्राओं के कपड़े उतरवाए गए अर्चिता फुकन और Kendra Lust की वायरल तस्‍वीरें! जानिए Babydoll Archi की हैरान कर देने वाली कहानी बाइक और स्कूटर चलाने वालों के लिए बड़ी खबर! Anti-Lock Braking System लो हो गया पंचायत सीजन 4 रिलीज, यहां देखें