शशि थरूर ने अंग्रेज़ी भाषा को क्यों बनाया मज़ाक का पात्र?
Social Media Viral Video | हाल ही में सोशल मीडिया पर कांग्रेस सांसद और अंग्रेज़ी के धुरंधर वक्ता शशि थरूर (Shashi Tharoor) का एक वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में वे अंग्रेज़ी भाषा की वर्तनी (English Spellings) और संख्या नामों (Number Names) की पेचीदगियों पर मज़ेदार व्यंग्य करते दिखते हैं। थरूर ने अपनी क्लासिक शैली में सवाल उठाया कि आखिर अंग्रेज़ी भाषा में इतने “अनियमित नियम” क्यों हैं?
उनके अंदाज़ और बोलचाल ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर ऐसा हिट बना दिया कि कुछ ही घंटों में लाखों व्यूज़ आ गए। यह वीडियो अब हर प्लेटफ़ॉर्म — Instagram, X (Twitter) और YouTube Shorts पर चर्चा का विषय बन चुका है।
अंग्रेज़ी की वर्तनी (English Spellings) इतनी उलझी हुई क्यों मानी जाती है?
थरूर ने कहा — “अगर ‘through’, ‘though’, ‘rough’ और ‘bough’ की वर्तनी में समानता है तो उच्चारण अलग क्यों?”
यह सवाल न केवल व्यंग्य था, बल्कि उस समस्या की ओर भी इशारा करता है जो दुनिया भर के English Learners (अंग्रेज़ी सीखने वाले) झेलते हैं।
कई भाषाविदों का मानना है कि अंग्रेज़ी भाषा में सदियों से चले आ रहे अलग-अलग उच्चारण-नियम और विदेशी प्रभावों (Latin, French, Germanic) ने इसकी संरचना को उलझा दिया है।
थरूर ने इस बिंदु को इतनी सहजता से प्रस्तुत किया कि सोशल मीडिया यूज़र्स हँसते-हँसते सोच में पड़ गए — क्या वाकई अंग्रेज़ी सीखना इतना जटिल है या हम ही इसे कठिन बना देते हैं?
थरूर का हास्य (Humor) क्यों काम कर गया?
शशि थरूर (Shashi Tharoor) का व्यक्तित्व हमेशा से “इंटेलेक्चुअल ह्यूमर (Intellectual Humor)” का पर्याय रहा है।
वे केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उनके चयन, लहजे और टोन से भी दर्शकों को आकर्षित करते हैं।
इस बार उन्होंने ‘अंग्रेज़ी भाषा की विसंगतियों’ पर जो प्रस्तुति दी, वह न केवल हास्यास्पद थी, बल्कि गहराई में जाकर यह बताती है कि भाषा में Consistency (संगति) की कितनी आवश्यकता है।
लोगों ने इस वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा —
“अब अंग्रेज़ी भी थरूर से डरने लगी होगी!”
“उनके जैसा अंग्रेज़ी बोलने वाला कोई नहीं, पर जब वो मज़ाक उड़ाते हैं तो भाषा भी हँस पड़ती है।”
क्या भाषा पर व्यंग्य करना ट्रेंड बन गया है?
आज के डिजिटल युग में Language Humor (भाषाई हास्य) सोशल मीडिया का अहम हिस्सा बन चुका है।
चाहे वह हिंदी के टाइपो हों या अंग्रेज़ी के उच्चारण, यूज़र्स ऐसे कंटेंट से आसानी से जुड़ जाते हैं क्योंकि यह “रिलेटेबल” होता है।
इसी वजह से थरूर का यह वीडियो केवल “इंग्लिश जोक” नहीं, बल्कि एक Social Media Viral Video (सोशल मीडिया वायरल वीडियो) बन गया।
वायरलिटी का यह फॉर्मूला भाषा + हास्य + इंटेलिजेंस का मिश्रण है — जो दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ सोचने पर मजबूर करता है।
क्या अंग्रेज़ी की कठिन वर्तनी शिक्षा प्रणाली की समस्या है?
कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अंग्रेज़ी के Spelling Rules (वर्तनी नियम) इतने असंगत हैं कि विद्यार्थियों को याद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता।
इस वजह से कई बार अंग्रेज़ी-भाषी देश भी अपने बच्चों को Phonetic Learning (ध्वनि आधारित शिक्षा) की ओर ले जाने लगे हैं।
थरूर का वीडियो अप्रत्यक्ष रूप से इस बहस को फिर से जीवित कर देता है — क्या भाषा सिखाना ज़रूरी है या भाषा को सरल बनाना?
सोशल मीडिया पर क्या प्रतिक्रियाएँ आईं?
कुछ प्रमुख प्रतिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
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“थरूर सर, अब हमें dictionary की spelling भी बदलनी पड़ेगी।”
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“जब तक थरूर हैं, तब तक grammar safe है।”
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“English spelling reform का नया चेहरा बन सकते हैं।”
सोशल मीडिया पर हैशटैग #ShashiTharoor, #EnglishSpellings, और #LanguageHumor ट्रेंड करने लगे।
वायरलिटी का स्तर इतना बढ़ गया कि विदेशी मीडिया पोर्टल्स ने भी इसे “Comedy Gold” करार दिया।
क्या थरूर का वीडियो भारतीय दर्शकों पर असर डालेगा?
भारत में अंग्रेज़ी ज्ञान को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है।
ऐसे में जब कोई विद्वान नेता खुद अंग्रेज़ी भाषा की कठिनाइयों पर मज़ाक उड़ाता है, तो यह लोगों में आत्मविश्वास पैदा करता है।
कई भारतीय शिक्षकों ने कहा कि वे अब इस वीडियो को कक्षा में उदाहरण के तौर पर दिखाना चाहेंगे ताकि छात्र भाषा के डर से मुक्त हो सकें।
यह एक सकारात्मक बदलाव हो सकता है — जब Learning English (अंग्रेज़ी सीखना) तनाव नहीं, बल्कि मज़ेदार प्रक्रिया बन जाए।
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थरूर के इस अंदाज़ से राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
राजनीति में थरूर अपनी Intellectual Image (बौद्धिक छवि) के लिए जाने जाते हैं।
उनका यह हास्य-वीडियो राजनीति से परे जाकर उन्हें एक “Modern Thinker” और “Educated Humorist” के रूप में स्थापित करता है।
लोगों का कहना है कि थरूर अब केवल संसद के वक्ता नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के “Vocabulary Icon” बन चुके हैं।
इससे यह भी पता चलता है कि आज के राजनेता केवल भाषण नहीं, बल्कि Digital Engagement (डिजिटल जुड़ाव) से जनता तक पहुँच बनाना जानते हैं।
क्या यह सिर्फ एक वीडियो है या एक संदेश भी?
शशि थरूर का यह व्यंग्य केवल Funny Clip (मज़ेदार क्लिप) नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि भाषा चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, उसमें हँसी और विनम्रता का स्थान हमेशा रहना चाहिए।
उनका यह ट्रेंड बताता है कि आधुनिक राजनीति और शिक्षा में Communication Skills (संचार कौशल) ही सबसे बड़ी ताकत है।
अगर हम इस वीडियो को शिक्षण, सोशल मीडिया और संवाद के दृष्टिकोण से देखें, तो यह आने वाले समय में भाषा-आधारित कंटेंट ट्रेंड्स के लिए दिशा-निर्देशक साबित हो सकता है।
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मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।










