लम्पी वायरस से सतर्क रहें: पशुओं का कराएं टीकाकरण, बीमारी दिखे तो तुरंत कराएं उपचार — प्रदेशभर में जागरूकता अभियान तेज
Lumpy Skin Disease Symptoms | मध्यप्रदेश में एक बार फिर लम्पी स्किन डिज़ीज़ (Lumpy Skin Disease) ने दस्तक दी है। जनसंपर्क संचालनालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, झाबुआ, रतलाम, बैतूल, बड़वानी, सिवनी, सागर और भोपाल जिलों में इस वायरस के कुछ मामलों की पुष्टि हुई है। इस पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने प्रदेशभर के पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें रोकथाम, पहचान और उपचार के उपाय बताए गए हैं।
🦠 क्या है लम्पी स्किन डिज़ीज़ (Lumpy Skin Disease)?
लम्पी स्किन डिज़ीज़ एक वायरस जनित संक्रामक रोग है, जो विशेष रूप से गाय और गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करता है। यह बीमारी कैप्रिपॉक्स वायरस (Capripox Virus) नामक वायरस से फैलती है। आमतौर पर यह वर्षा के मौसम या आर्द्र वातावरण में तेजी से फैलती है, क्योंकि उस समय मक्खी, मच्छर और किल्ली जैसे परजीवी सक्रिय रहते हैं, जो इस वायरस को एक पशु से दूसरे पशु में पहुंचाते हैं।
⚠️ लक्षण (Symptoms of Lumpy Skin Disease)
पशुपालन विभाग के अनुसार, इस रोग की शुरुआती पहचान बेहद ज़रूरी है। पशुपालक इन लक्षणों पर ध्यान दें —
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2 से 3 दिन तक हल्का बुखार रहना
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त्वचा पर गोल और उभरी हुई गठानें (Lumps) बनना
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मुख, गले और श्वासनली तक संक्रमण फैलना
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पैरों में सूजन आना
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दूध उत्पादन में भारी कमी
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गर्भपात या बांझपन की संभावना
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गंभीर स्थिति में मृत्यु तक हो सकती है
बीमारी से प्रभावित पशु अक्सर 2-3 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन दूध उत्पादन में कमी कई दिनों तक बनी रहती है।
🧬 बीमारी के फैलने के कारण (Causes and Transmission)
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मक्खी, मच्छर, किल्ली जैसे परजीवी वायरस को एक पशु से दूसरे पशु तक पहुंचाते हैं।
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संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने से अन्य पशु भी प्रभावित हो सकते हैं।
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गंदगी और अस्वच्छ पशुशाला इस वायरस के फैलने में सहायक बनती है।
💉 बचाव और उपचार (Prevention & Treatment)
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के संचालक डॉ. पी. एस. पटेल के अनुसार, प्रदेश में एल.एस.डी. (LSD) रोग प्रतिबंधात्मक टीकाकरण (Vaccination) की मुफ्त सुविधा उपलब्ध है।
अब तक अप्रैल 2025 से लेकर नवंबर तक 41.5 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
रोकथाम के उपाय:
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स्वस्थ पशुओं का तुरंत टीकाकरण कराएं।
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बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
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पशुशाला की नियमित सफाई करें।
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मक्खी, मच्छर, किल्ली आदि परजीवियों का नियंत्रण रखें।
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बीमार पशु में लक्षण दिखते ही नज़दीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें।
उपचार के दौरान ध्यान रखें:
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संक्रमित पशुओं को छांव में रखें।
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उन्हें स्वच्छ पानी और पोषक आहार दें।
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चिकित्सक के निर्देश के अनुसार एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाएं दी जा सकती हैं।
📞 सहायता के लिए राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम
पशुपालन विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा भोपाल में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।
पशुपालक किसी भी समय सहायता या परामर्श के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं:
📞 0755-2767583
🌾 किसानों और पशुपालकों से अपील
प्रदेश सरकार ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं की सेहत को लेकर सतर्क रहें और टीकाकरण अभियान में सक्रिय भागीदारी करें।
किसान भाइयों को याद रखना चाहिए कि रोकथाम ही इस बीमारी से बचाव का सबसे कारगर तरीका है।
समय रहते पशु चिकित्सक की सलाह लेना, बीमार पशुओं को अलग रखना और स्वच्छता बनाए रखना ही लम्पी वायरस से अपने पशुधन की सुरक्षा का एकमात्र उपाय है।
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