नए स्मार्टफोन्स में अनिवार्य ‘संचार साथी’ ऐप, डिलीट करने का विकल्प नहीं – DoT का सख्त निर्देश
DoT mandatory Sanchar Saathi app smartphones | साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को निर्देश जारी किया है कि वे अपने सभी नए उपकरणों में ‘संचार साथी’ साइबर सिक्योरिटी ऐप को प्री-इंस्टॉल करें। यह ऐप यूजर्स द्वारा डिलीट नहीं किया जा सकेगा, जो गोपनीयता संबंधी बहस छेड़ चुका है। 28 नवंबर 2025 को जारी इस आदेश के तहत कंपनियों को अमल के लिए 90 दिनों (मार्च 2026 तक) का समय दिया गया है। सप्लाई चेन में पहले से मौजूद फोन्स में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए ऐप जोड़ा जाएगा। DoT के अनुसार, यह कदम IMEI नंबरों की नकल (क्लोनिंग) से जुड़े फ्रॉड को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। जनवरी 2025 में लॉन्च हुए इस ऐप ने पहले ही 7 लाख से अधिक चोरी के मोबाइल ट्रेस करने में मदद की है।
आदेश की मुख्य बातें: क्या बदलेगा मोबाइल मार्केट?
दूरसंचार मंत्रालय के इस निर्देश का असर सैमसंग, एप्पल, शाओमी, वनप्लस जैसी सभी प्रमुख कंपनियों पर पड़ेगा। रॉयटर्स द्वारा देखे गए दस्तावेज के मुताबिक:
- प्री-इंस्टॉलेशन अनिवार्य: नए स्मार्टफोन्स में ऐप फैक्टरी सेटिंग्स से इंस्टॉल होगा।
- अनडिलीटेबल फीचर: यूजर्स इसे हटा नहीं सकेंगे, जो सिक्योरिटी को मजबूत बनाएगा लेकिन प्राइवेसी चिंताओं को जन्म दे रहा है।
- अपडेट के जरिए इंस्टॉलेशन: पहले से बाजार में आए फोन्स में OTA (ओवर-द-एयर) अपडेट से ऐप डाला जाएगा।
- समय सीमा: 90 दिनों में अनुपालन सुनिश्चित करना होगा, वरना जुर्माना या अन्य कार्रवाई संभव।
यह कदम भारत में साइबर फ्रॉड के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए उठाया गया है। NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में साइबर अपराधों के 1.5 लाख से अधिक केस दर्ज हुए, जिनमें फर्जी कॉल और SMS से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। DoT का मानना है कि ‘संचार साथी’ ऐप यूजर्स को सशक्त बनाकर इन धोखाधड़ियों पर लगाम लगाएगा।
‘संचार साथी’ ऐप: फीचर्स और फायदे
DoT द्वारा विकसित यह ऐप यूजर्स को साइबर दुनिया में सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन किया गया है। जनवरी 2025 में लॉन्च होने के बाद से यह तेजी से लोकप्रिय हुआ है। मुख्य फीचर्स निम्न हैं:
| फीचर | विवरण |
|---|---|
| फ्रॉड रिपोर्टिंग | संदिग्ध कॉल, SMS या ऐप्स की तुरंत रिपोर्टिंग; AI आधारित अलर्ट सिस्टम। |
| डिवाइस वेरिफिकेशन | IMEI चेक करके फोन की असलीयत जांचें; क्लोनिंग का खतरा कम। |
| चोरी/खोया फोन ट्रेस | GPS और IMEI से लोकेशन ट्रैक; पुलिस को डायरेक्ट रिपोर्ट। |
| सुरक्षा टिप्स | रीयल-टाइम साइबर थ्रेट अलर्ट और जागरूकता नोटिफिकेशन। |
| इंटीग्रेशन | TAFCOP (Telecom Analytics for Fraud Management and Consumer Protection) से जुड़ा। |
ऐप ने लॉन्च के पहले 11 महीनों में ही 7 लाख चोरी के मोबाइल्स को ट्रेस करने में सफलता हासिल की, जिससे लाखों यूजर्स को राहत मिली। DoT के एक अधिकारी ने बताया, “यह ऐप न केवल फ्रॉड रोकता है, बल्कि यूजर्स को सशक्त बनाता है। अब तक 5 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं।”
कार्यान्वयन: कंपनियों की प्रतिक्रिया और चुनौतियां
कंपनियों को मार्च 2026 तक अनुपालन करना होगा, लेकिन चुनौतियां भी हैं। एप्पल जैसी कंपनियों को iOS पर इसे इंटीग्रेट करने में अतिरिक्त प्रयास लगेंगे। सैमसंग और शाओमी ने कहा है कि वे निर्देशों का पालन करेंगी, लेकिन गोपनीयता विशेषज्ञ चिंतित हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इसे ‘पेगासस जैसा स्पाइवेयर’ बता रहे हैं, क्योंकि ऐप बैकग्राउंड में डेटा कलेक्ट कर सकता है।
प्राइवेसी एडवोकेट्स का कहना है, “सिक्योरिटी जरूरी है, लेकिन यूजर की सहमति के बिना अनडिलीटेबल ऐप गोपनीयता का उल्लंघन है।” DoT ने स्पष्ट किया है कि ऐप केवल फ्रॉड डिटेक्शन के लिए डेटा इस्तेमाल करेगा और GDPR जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करेगा।
विशेषज्ञों की राय: फायदे vs जोखिम
- सुरक्षा विशेषज्ञ (किबर सिक्योरिटी फर्म से): “यह कदम भारत जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए स्वागतयोग्य है। IMEI क्लोनिंग से सालाना 5,000 करोड़ का नुकसान होता है।”
- गोपनीयता कार्यकर्ता: “अनिवार्य इंस्टॉलेशन से यूजर चॉइस खत्म हो जाती है। स्वैच्छिक अपनाना बेहतर होता।”
- इंडस्ट्री एनालिस्ट: “कंपनियां जल्दी अनुपालन करेंगी, लेकिन अपडेट में डिले से यूजर असुविधा हो सकती है।”
डिजिटल सुरक्षा की नई शुरुआत?
‘संचार साथी’ ऐप साइबर फ्रॉड के खिलाफ सरकार का मजबूत इरादा दर्शाता है। हालांकि, प्राइवेसी संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। यूजर्स को सलाह है कि ऐप का इस्तेमाल करें और साइबर जागरूकता बढ़ाएं। अधिक जानकारी के लिए DoT की वेबसाइट sanchaarsaathi.gov.in पर विजिट करें। क्या यह कदम फ्रॉड को जड़ से उखाड़ फेंकेगा? समय बताएगा।
यह भी पढ़ें…
2 दिसंबर 2025 को सोने के दामों में हल्की गिरावट, MCX पर 1,30,280 रुपये/10g; जानें अपने शहर का लेटेस्ट रेट
मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।









