संचार साथी ऐप पर भयंकर बवाल: विपक्ष का सीधा आरोप – साइबर सुरक्षा के बहाने नागरिकों की जासूसी बंद करो!
Sanchar Saathi App Controversy | नई दिल्ली: दूरसंचार विभाग (DoT) के ‘संचार साथी’ ऐप को नए स्मार्टफोन्स में प्री-इंस्टॉल करने के विवादास्पद आदेश ने राजनीतिक हंगामा मचा दिया था, लेकिन अब सरकार ने इसे वापस ले लिया है। विपक्ष के तीखे विरोध और निजता विशेषज्ञों की आलोचना के बाद 3 दिसंबर 2025 को केंद्र ने फैसला उलट दिया। कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा, AAP के अरविंद केजरीवाल और शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे ‘जासूसी का हथियार’ करार देते हुए सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया था। अब विपक्ष इसे अपनी जीत बता रहा है।
विवाद की शुरुआत: DoT का 28 नवंबर का आदेश
- DoT ने 28 नवंबर 2025 को दिशा-निर्देश जारी कर सभी मोबाइल निर्माता कंपनियों (जैसे Samsung, Apple, Xiaomi) को नए फोनों में ‘संचार साथी’ ऐप प्री-इंस्टॉल करने का आदेश दिया।
- कंपनियों को 90 दिनों का समय दिया गया, और ऐप को डिलीट या डिसेबल न करने की शर्त थी।
- सरकारी दावा: ऐप IMEI चेकिंग, फर्जी कॉल/मैसेज रिपोर्टिंग, चोरी के फोन ब्लॉक करने और साइबर फ्रॉड रोकने के लिए है। लॉन्च के बाद से 1.4 करोड़ डाउनलोड्स हो चुके हैं।
विपक्ष का तीखा हमला: ‘निगरानी का नया हथियार’
विपक्ष ने इसे नागरिक निजता पर हमला बताते हुए संसद से लेकर सोशल मीडिया तक विरोध जताया। मुख्य बयान:
- प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस): “यह जासूसी ऐप है! साइबर सुरक्षा के नाम पर सरकार हर नागरिक के फोन में झांकना चाहती है। फ्रॉड रोकना और निगरानी में फर्क होता है। तानाशाही बढ़ रही है – संसद में बहस से भाग रही सरकार।” उन्होंने चेतावनी दी कि संदेशों पर नजर रखना संविधान के खिलाफ है।
- अरविंद केजरीवाल (AAP): “मोदी सरकार का यह आदेश लोगों की आजादी पर खुला हमला है। दुनिया के किसी लोकतंत्र ने ऐसा नहीं किया। सहमति के बिना इंस्टॉल, डिलीट का विकल्प नहीं – तुरंत वापस लो!” AAP ने इसे ‘बड़े तानाशाही कदम’ की निंदा की।
- प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना UBT): “प्री-इंस्टॉल के बहाने निजी जिंदगी में दखल! हर गतिविधि ट्रैक हो सकती है। निजता का उल्लंघन है – हम हर स्तर पर विरोध करेंगे।”
डिजिटल राइट्स एक्टिविस्ट्स ने भी चिंता जताई कि ऐप को रूट-लेवल एक्सेस मिलने से अन्य ऐप्स की डेटा पर नजर रखी जा सकती है। कांग्रेस ने संसद में बहस की मांग की।
सरकार का बचाव और U-Turn
- शुरू में दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादitya सिंधिया ने कहा, “स्नूपिंग संभव नहीं। ऐप वैकल्पिक है, डिलीट कर सकते हैं। यह जन भागीदारी के लिए है।”
- लेकिन विरोध के बाद 3 दिसंबर को मंत्रालय ने बयान जारी: “ऐप की लोकप्रियता बढ़ रही है (नवंबर में 30 लाख मासिक यूजर्स), इसलिए प्री-इंस्टॉल अनिवार्य नहीं।” आधिकारिक नोटिफिकेशन जल्द जारी होगा।
- DoT का तर्क: विवाद के बाद डाउनलोड्स में स्पाइक आया, अब जरूरत नहीं। ऐप अब भी उपलब्ध रहेगा, लेकिन जबरन नहीं।
क्या है संचार साथी ऐप?
- उद्देश्य: साइबर फ्रॉड से बचाव – फर्जी IMEI चेक, स्पैम रिपोर्ट, चोरी फोन ब्लॉक।
- फीचर्स: फोन नंबर रजिस्ट्रेशन (ऑटोमैटिक), मैसेज/कॉल रिपोर्टिंग, RBI से लिंक फाइनेंशियल फ्रॉड ट्रैकिंग।
- प्राइवेसी चिंताएं: ऐप को लोकेशन, कॉन्टैक्ट्स, SMS एक्सेस चाहिए। रजिस्ट्रेशन बिना सहमति के होता है।
- सफलता: 2023 से अब तक 7 लाख से ज्यादा चोरी फोन रिकवर, रोज 2,000 फ्रॉड रिपोर्ट्स।
प्रभाव और आगे क्या?
यह U-Turn विपक्ष की नैतिक जीत है, लेकिन सवाल बाकी: क्या ऐप अभी भी प्राइवेसी जोखिम पैदा करता है? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी पहलें में ट्रांसपेरेंसी जरूरी। मोबाइल कंपनियां अब राहत की सांस ले रही हैं। पूर्ण डिटेल्स के लिए DoT वेबसाइट चेक करें।
विपक्षी नेता इसे ‘लोकतंत्र की जीत’ बता रहे हैं, जबकि सरकार ‘जन-केंद्रित कदम’ का दावा कर रही। क्या यह विवाद साइबर सिक्योरिटी vs प्राइवेसी बहस को नई दिशा देगा? राय बन रही है…
मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।









