महिदपुर कस्तूरबा गांधी कन्या छात्रावास में धुएं से 15 छात्राओं की तबीयत बिगड़ी, मचा हड़कंप
महिदपुर में रविवार रात को कस्तूरबा गांधी कन्या छात्रावास में फैले धुएं ने मचाई खलबली: आंखों में जलन, सांस फूलने से 15 छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया गया; विधायक ने की जांच की मांग, SDM-SDOP ने लिया तुरंत संज्ञान
Mahidpur Kasturba Girls Hostel Poisonous Smoke | उज्जैन जिले से करीब 60 किलोमीटर दूर महिदपुर तहसील में स्थित कस्तूरबा गांधी कन्या छात्रावास (Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya – KGBV) में रविवार रात एक रहस्यमयी घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। छात्रावास के बाहर दशहरा मैदान में संदिग्ध गाड़ियों के आने के बाद अचानक धुंआ जैसी गैस कमरों में घुस आई, जिससे रह रही करीब 15 छात्राओं की आंखों में तेज जलन होने लगी और खांसी व सांस लेने में कठिनाई महसूस हुई। घटना से छात्रावास में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन त्वरित कार्रवाई से सभी छात्राओं को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत अब स्थिर है और खतरे से बाहर हैं, लेकिन यह घटना छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
रात 8:45 बजे शुरू हुई खलबली
- समय और जगह: रविवार रात करीब 8:45 बजे (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 9:45 बजे) महिदपुर के कस्तूरबा गांधी कन्या छात्रावास में यह हादसा हुआ। यह छात्रावास शिक्षा विभाग के तहत चलाया जाता है और मुख्य रूप से ग्रामीण व कमजोर वर्ग की लड़कियों के लिए आवासीय शिक्षा प्रदान करता है। छात्रावास में करीब 100 से अधिक छात्राएं रहती हैं।
- कैसे फैला धुआं? छात्राओं के अनुसार, छात्रावास के बाहर स्थित दशहरा मैदान (एक खुला खेल का मैदान) में कुछ अज्ञात गाड़ियां घूमती नजर आईं। इसके तुरंत बाद खिड़कियों व दरवाजों से धुंआ जैसी तेज गंध वाली गैस अंदर घुसने लगी। यह गैस इतनी घनी थी कि कमरों में अंधेरा छा गया और हवा में जलन पैदा करने वाली गंध फैल गई। छात्राओं ने बताया कि वे रात के भोजन के बाद पढ़ाई कर रही थीं जब यह धुआं अचानक कमरों में भर गया।
- प्रभावित छात्राएं: सबसे ज्यादा असर 6वीं से 8वीं कक्षा की 15 छात्राओं पर पड़ा, जिनकी उम्र 11 से 14 वर्ष के बीच है। आंखों में तेज जलन, लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ और मतली जैसी शिकायतें हुईं। बाकी छात्राओं को भी हल्की असुविधा हुई, लेकिन वे सुरक्षित रहीं।
तुरंत राहत और चिकित्सा: अस्पताल में भर्ती, अब सब ठीक
छात्रावास के प्राचार्य अर्जुनसिंह दावरे और स्टाफ ने फौरन अलर्ट जारी किया। छात्राओं को तुरंत महिदपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने ऑक्सीजन थेरेपी, आंखों की धुलाई और एंटी-इरिटेंट दवाएं देकर उनका इलाज शुरू किया।
- डॉक्टरों का बयान: अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राजेश शर्मा ने बताया, “छात्राओं को स्मोक इन्हेलेशन (धुएं से सांस लेने की समस्या) का सामना करना पड़ा था। शुरुआती जांच में कोई गंभीर क्षति नहीं दिख रही। अधिकांश को कुछ घंटों में छुट्टी दे दी गई है, जबकि 4-5 को रात भर निगरानी में रखा गया।”
- रिकवरी स्टेटस: सोमवार सुबह तक सभी 15 छात्राएं स्वस्थ बताई जा रही हैं। कोई स्थायी नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अगले 24 घंटे आराम करें और धुएं से दूर रहें।
प्रशासनिक हलचल: विधायक, SDM और SDOP ने की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय विधायक दिनेश बोस (महिदपुर विधानसभा क्षेत्र) अस्पताल पहुंचे। उन्होंने छात्राओं से व्यक्तिगत बातचीत की और उनकी हालत का जायजा लिया। विधायक बोस ने डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए तथा जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर तत्काल जांच की मांग की।
- अधिकारी पहुंचे: SDM (उपखंड मजिस्ट्रेट) महेश पटेल और SDOP (उप पुलिस अधीक्षक) राकेश वर्मा भी अस्पताल गए। उन्होंने छात्राओं व स्टाफ से विस्तृत पूछताछ की, फिर छात्रावास का निरीक्षण किया। SDM पटेल ने कहा, “यह एक संदिग्ध घटना लग रही है। धुएं के स्रोत की जांच के लिए फॉरेंसिक टीम बुलाई जा रही है। छात्रावास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।”
- जांच का फोकस: प्राथमिक जांच में पता चला कि धुआं बाहर से आया था, संभवतः वाहनों से निकलने वाली किसी रसायनिक गैस या टायर जलने जैसी। CCTV फुटेज खंगारे जा रहे हैं, और मैदान के आसपास के वाहनों की तलाश की जा रही है। क्या यह कोई दुर्घटना थी या जानबूझकर की गई शरारत? यह सवाल अभी अनुत्तरित है। शिक्षा विभाग ने भी उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
पृष्ठभूमि: KGBV योजना और सुरक्षा चिंताएं
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) योजना 2004 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई थी, जो ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आवासीय स्कूल चलाती है। मध्य प्रदेश में सैकड़ों ऐसे छात्रावास हैं, लेकिन हाल के वर्षों में सुरक्षा मुद्दे सुर्खियां बने हैं – जैसे झारखंड में शॉर्ट-सर्किट से धुआं फैलना या आंध्र प्रदेश में आग लगना। इस घटना ने फिर से उठाया सवाल: क्या छात्रावासों में वेंटिलेशन, CCTV और इमरजेंसी प्रोटोकॉल पर्याप्त हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण छात्रावासों में अक्सर बुनियादी सुविधाओं की कमी होती है, जो ऐसी घटनाओं को आमंत्रित करती है।
प्रभाव और आगे की राह
- छात्रावास पर असर: सोमवार को कक्षाएं स्थगित कर दी गईं। अभिभावकों को सूचित किया गया है, और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जा रही है। छात्रावास को अस्थायी रूप से बंद करने पर विचार हो रहा है जब तक जांच पूरी न हो।
- सुरक्षा सुझाव: विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि छात्रावासों में स्मोक डिटेक्टर, गैस मास्क और नियमित ड्रिल अनिवार्य हों। अभिभावक भी सतर्क रहें – नियमित संपर्क रखें।
- सकारात्मक नोट: छात्राओं की बहादुरी की तारीफ हो रही है। एक छात्रा ने बताया, “हमने एक-दूसरे का साथ दिया और शांत रहे। अब सब ठीक है।”
यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे राज्य में जागरूकता फैला रही है। प्रशासन ने वादा किया है कि दोषियों को सजा मिलेगी और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उज्जैन-महिदपुर के निवासी अब इंतजार कर रहे हैं जांच रिपोर्ट का, जो जल्द ही सामने आ सकती है।
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मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।









