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कैबिनेट का बड़ा फैसला: सरकारी सेवा में अब केवल तीन कैटेगरी – नियमित, संविदा और आउटसोर्स

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कैबिनेट का बड़ा फैसला: सरकारी सेवा में अब केवल तीन कैटेगरी – नियमित, संविदा और आउटसोर्स

MP government service categories reduced to three | मुख्य हाइलाइट: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 16 दिसंबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में सरकारी सेवा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव किया गया। कार्यभारित (वर्कचार्ज), आकस्मिक स्थापना (कंटिनजेंसी), दैनिक वेतन भोगी और 240 दिवसीय स्थायी वर्गीकृत कर्मी सहित चार (कुछ स्रोतों में 7 कैटेगरी) कैडर को सांख्येतर (डाइंग कैडर) घोषित कर दिया गया। इन पदों पर अब कोई नई भर्ती नहीं होगी। प्रदेश में इन कैडर में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या करीब 1.25 से 1.50 लाख है। अब राज्य शासन में केवल तीन तरह की सेवाएं रहेंगी: नियमित, संविदा और आउटसोर्स।

मौजूदा कर्मचारियों पर कोई असर नहीं

  • सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान कर्मचारियों की नौकरी, वेतन या सेवा लाभों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  • सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति स्थायी पद पर मिलेगी।
  • दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को पहले ही औद्योगिक श्रमिक का दर्जा दिया जा चुका है, इसलिए उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

फैसला क्यों लिया गया?

  • स्थायी और अस्थायी पदों के बीच भेदभाव खत्म करने के लिए।
  • कर्मचारियों के अधिकारों में समानता लाना, जैसे अर्जित अवकाश, ग्रेच्युटी की गणना और अनुकंपा नियुक्ति में एकरूपता।
  • कोर्ट-कचहरी के पुराने विवादों का समाधान।
  • आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा, क्योंकि नई भर्तियां बंद होंगी और मौजूदा लाभ जारी रहेंगे।

सबसे ज्यादा असर किन विभागों पर?

  • लोक निर्माण विभाग (PWD) और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) पर सर्वाधिक प्रभाव।
  • इन विभागों में इन कैडर के करीब 70% कर्मचारी कार्यरत हैं।
  • कारण: अब बड़े प्रोजेक्ट ठेका (टेंडर) प्रक्रिया से निजी एजेंसियों द्वारा कराए जाते हैं, इसलिए इन कैडर की जरूरत कम हो गई।

यह फैसला सरकारी सेवा को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पुराने भेदभाव समाप्त होने से कर्मचारियों को राहत मिलेगी।


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