रात में एंग्जायटी क्यों बढ़ जाती है? एक्सपर्ट्स से जानें कारण

रात में एंग्जायटी क्यों बढ़ जाती है? एक्सपर्ट्स से जानें कारण

Why anxiety gets worse at night | आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में रात की चैन भरी नींद एक सपना बन गई है। कई लोग बिस्तर पर घंटों करवटें बदलते रहते हैं, लेकिन नींद नहीं आती। दिन भर दबे हुए तनाव, ऑफिस की चिंताएं, रिश्तों की उलझनें और भविष्य की फिक्रें रात में अचानक सिर उठा लेती हैं। मिर्जा गालिब की मशहूर शायरी याद आती है – “मौत का एक दिन मुअय्यन है, नींद क्यों रात भर नहीं आती।” सच में, जिसे रात की गहरी नींद मिल जाए, वही खुशनसीब है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, रात में एंग्जायटी बढ़ने के मुख्य कारण ये हैं:

  • दिन भर की व्यस्तता का खत्म होना: दिन में काम, लोग और distractions से दिमाग व्यस्त रहता है। रात में शांति होने पर दबे हुए विचार सामने आ जाते हैं। इससे रूमिनेशन (बार-बार एक ही बात सोचना) शुरू हो जाता है।
  • शारीरिक और हार्मोनल बदलाव: शाम ढलते ही कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर प्रभावित होता है, और दिमाग अलर्ट मोड में चला जाता है। नींद की कमी और एंग्जायटी एक दुष्चक्र बना लेती हैं – एक दूसरे को बढ़ाती रहती हैं।
  • कम distractions: रात में आसपास शांत होने से दिमाग को चिंताओं पर फोकस करने का पूरा मौका मिल जाता है।

अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो चिंता न करें – आप अकेले नहीं हैं। कई अध्ययनों में पाया गया है कि एंग्जायटी और नींद की समस्या आम है, और इसे कुछ आसान आदतों से कंट्रोल किया जा सकता है।

अच्छी नींद के लिए एक्सपर्ट टिप्स

  1. वरी टाइम सेट करें: सोने से पहले 20-30 मिनट का समय निकालें, जहां आप अपनी सारी चिंताओं को कागज पर लिख लें। जो दिमाग में घूम रहा है, उसे उतार दें। इससे दिमाग को संकेत मिलता है कि दिन खत्म हो गया और अब आराम का समय है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये छोटा रूटीन दिमाग को शांत करने में बहुत प्रभावी है। (ये तकनीक CBT से ली गई है और रिसर्च में साबित हुई है।)
  2. फोन और स्क्रीन से दूर रहें: ब्लू लाइट दिमाग को एक्टिव रखती है और मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है। बिस्तर से फोन दूर रखें, अलार्म के लिए पुराना क्लॉक यूज करें। रात में नींद खुलने पर फोन न छुएं।
  3. नींद न आए तो बिस्तर छोड़ दें: बेचैन होकर लेटे रहने से बचें। उठकर कोई शांत काम करें – जैसे किताब पढ़ना (स्क्रीन वाली नहीं), हल्की स्ट्रेचिंग, कपड़े फोल्ड करना या ड्रॉइंग। इससे विचारों की रफ्तार कम होती है। ध्यान रखें, रोमांचक कुछ न करें।
  4. फाइव सेंसेज ग्राउंडिंग तकनीक आजमाएं: अगर दिमाग बहुत तेज भाग रहा हो, तो ये मेडिटेशन ट्राई करें:
    • 5 चीजें देखें जो आसपास दिख रही हों।
    • 4 चीजें छुएं (जैसे बिस्तर की चादर, तकिए की बनावट)।
    • 3 आवाजें सुनें (कमरे की घड़ी, बाहर की हवा आदि)।
    • 2 खुशबुएं सूंघें।
    • 1 चीज का स्वाद लें (पानी पीकर)। इससे आप वर्तमान में लौट आते हैं और बीते या आने वाले कल की चिंताओं से दूर हो जाते हैं। ये तकनीक एंग्जायटी और पैनिक अटैक में तुरंत राहत देती है।
  5. दिन की आदतें सुधारें: दिन में बाहर टहलें, ताजी हवा और धूप लें। हल्की एक्सरसाइज, अच्छा खाना, ब्रेक लेना और दोस्तों से बात करना रात की एंग्जायटी कम करता है। शरीर की जैविक घड़ी संतुलित रहती है।

ये छोटे बदलाव अपनाकर आप रात की बेचैनी को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। अगर समस्या लगातार बनी रहे और दिनचर्या प्रभावित हो, तो डॉक्टर या मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लें। अच्छी नींद आपकी सेहत और खुशी की कुंजी है – इसे प्राथमिकता दें!


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