दिल्ली विधानसभा में बंदरों का आतंक: लंगूर की आवाज निकालने वालों की भर्ती, 8 घंटे की शिफ्ट में 17.5 लाख का टेंडर जारी

दिल्ली विधानसभा में बंदरों का आतंक: लंगूर की आवाज निकालने वालों की भर्ती, 8 घंटे की शिफ्ट में 17.5 लाख का टेंडर जारी

humans hired to mimic langur sounds Delhi | नई दिल्ली, 3 जनवरी 2026: दिल्ली विधानसभा परिसर में बंदरों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने एक अनोखा कदम उठाया है। विधानसभा ने लंगूर की आवाज निकालकर बंदरों को भगाने वाले विशेषज्ञों की भर्ती के लिए 17.5 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। यह फैसला बंदरों के लगातार हमलों और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के बाद लिया गया है, जहां बंदर तार उखाड़ते हैं, डिश एंटीना तोड़ते हैं और कभी-कभी विधानसभा भवन के अंदर तक घुस जाते हैं।

बंदरों की समस्या का इतिहास और कारण

दिल्ली में बंदरों का आतंक कोई नई बात नहीं है। 2017 में एक बंदर विधानसभा सदन के अंदर घुस गया था, जिसके बाद तत्कालीन स्पीकर राम निवास गोयल ने विधायकों को काटने के खतरे का जिक्र किया था। तब से कई उपाय अपनाए गए, लेकिन समस्या बनी हुई है। पहले दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन जैसी एजेंसियां असली लंगूरों का इस्तेमाल करती थीं, लेकिन पर्यावरण मंत्रालय के 2012 के सर्कुलर के बाद असली लंगूरों का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया गया। उसके बाद से लंगूर की आवाज निकालने वाले लोगों पर निर्भरता बढ़ी, लेकिन परिणाम असंगत रहे। 2020 से एजेंसियों की तलाश शुरू हुई और 2022 में कॉन्ट्रैक्ट साइन किए गए, लेकिन बंदरों ने कटआउट्स जैसी चीजों की आदत डाल ली और वे उन पर बैठकर निगरानी करने लगे। अधिकारी इसे मानवीय और गैर-हानिकारक तरीका बताते हैं।

भर्ती की डिटेल्स और जॉब डिस्क्रिप्शन

टेंडर के अनुसार, कॉन्ट्रैक्टर के माध्यम से कुशल विशेषज्ञों को नियुक्त किया जाएगा। इन विशेषज्ञों की मुख्य योग्यता लंगूर की आवाज को इतनी सटीकता से निकालना है कि बंदर डरकर भाग जाएं। इंजीनियर-इन-चार्ज किसी भी समय उनकी क्षमता की जांच कर सकता है, और अगर आवाज सही नहीं लगी तो उन्हें तुरंत हटाया जा सकता है। सप्ताह में सोमवार से शुक्रवार तक 5 विशेषज्ञ और शनिवार को 2 विशेषज्ञ तैनात रहेंगे। हर विशेषज्ञ को 8 घंटे की शिफ्ट में काम करना होगा। अनुपस्थिति पर प्रति दिन 1,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। कॉन्ट्रैक्टर को सभी विशेषज्ञों का बीमा कराना होगा और ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना की जिम्मेदारी लेनी होगी—विधानसभा या PWD पर कोई दायित्व नहीं होगा। विभाग किसी भी समय कॉन्ट्रैक्ट समाप्त कर सकता है बिना अतिरिक्त क्लेम के।

क्यों जरूरी हो गई यह भर्ती?

विधानसभा परिसर में बंदर विधायकों, स्टाफ और विजिटर्स के लिए खतरा बने हुए हैं। वे न केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि सुरक्षा जोखिम भी बढ़ाते हैं। पहले के उपाय जैसे लंगूर कटआउट्स फेल हो चुके हैं—बंदर उन पर बैठकर आराम करते हैं। अधिकारी कहते हैं, “लंगूर की आवाज निकालना सबसे प्रभावी गैर-हानिकारक तरीका है।” हालांकि, पिछले अनुभवों में कुछ बंदर भागे तो कुछ टकटकी लगाकर देखते रहे। फिर भी, यह दिल्ली के लिए एक नई नौकरी का अवसर बन सकता है अगर सफल रहा।

अधिकारियों का पक्ष

एक अधिकारी ने कहा, “यह मानवीय समाधान है जो बंदरों को बिना नुकसान पहुंचाए भगाता है।” टेंडर हाल ही में जारी किया गया है और उम्मीद है कि जल्द ही कॉन्ट्रैक्टर चुना जाएगा। दिल्ली में पहले भी G20 जैसे इवेंट्स के दौरान ऐसे उपाय अपनाए गए थे, लेकिन विधानसभा के लिए यह स्थायी समाधान की कोशिश है।

यह कदम दिल्ली की शहरी वन्यजीव समस्या को हल करने की दिशा में एक रचनात्मक प्रयास है, लेकिन इसका असर समय बताएगा। अगर आप विधानसभा क्षेत्र में रहते हैं तो सतर्क रहें—जल्द ही लंगूर की आवाजें सुनाई दे सकती हैं!


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