तनाव क्यों बन जाता है गैस, कब्ज और एसिडिटी का सबसे बड़ा कारण? एक्सपर्ट बताते हैं पूरा विज्ञान
How Stress Causes Constipation | आजकल हम अक्सर कह देते हैं, “अरे, तनाव तो सबके जीवन में है, इसमें क्या बड़ी बात है?” लेकिन सच यह है कि क्रॉनिक स्ट्रेस (लंबे समय तक रहने वाला तनाव) धीरे-धीरे आपके शरीर को अंदर से खोखला कर देता है। हल्का-फुल्का तनाव अलग बात है, लेकिन जब महीनों या सालों तक आप एक के बाद एक चुनौतियों से जूझते रहें, इमोशंस दबाते रहें और तनाव का बोझ बढ़ता जाए, तो यह नॉर्मल नहीं रहता।
इस क्रॉनिक स्ट्रेस का सबसे ज्यादा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। नतीजा? गैस, ब्लोटिंग, कब्ज, एसिडिटी, अपच जैसी समस्याएं रोजमर्रा की हो जाती हैं। आइए समझते हैं कि तनाव आपके पेट को इतना परेशान क्यों कर देता है।
तनाव और पाचन तंत्र का गहरा कनेक्शन – ब्रेन-गट एक्सिस
एक्सपर्ट्स के अनुसार, हमारे दिमाग और आंतों (Brain-Gut Axis) के बीच सीधा और मजबूत रिश्ता है। जब हम लंबे समय तक स्ट्रेस में रहते हैं, तो शरीर “फाइट या फ्लाइट” मोड में चला जाता है। इस दौरान:
- डाइजेस्टिव एंजाइम्स का उत्पादन कम हो जाता है स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल, एड्रेनालिन) बढ़ने से पाचन एंजाइम्स और गैस्ट्रिक जूस का स्राव घट जाता है। खाना ठीक से पचता नहीं, जिससे अपच, गैस और एसिडिटी बढ़ती है।
- गट बैक्टीरिया में असंतुलन (Dysbiosis) अच्छे बैक्टीरिया कम होते हैं, खराब बैक्टीरिया बढ़ते हैं। इससे IBS (Irritable Bowel Syndrome), कब्ज, दस्त, ब्लोटिंग जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
- आंतों में ब्लड फ्लो कम होना स्ट्रेस में शरीर ऊर्जा को पाचन से हटाकर दिल, दिमाग और मांसपेशियों की तरफ मोड़ देता है। आंतों में खून कम पहुंचने से पाचन धीमा पड़ जाता है और कब्ज की शिकायत बढ़ जाती है।
- खान-पान और नींद का बिगड़ना तनाव में लोग अनियमित समय पर खाते हैं, जंक फूड ज्यादा लेते हैं या भूख ही नहीं लगती। साथ ही नींद की कमी से भी हार्मोन असंतुलित होते हैं, जो पाचन को और खराब करते हैं।
नतीजा: ये समस्याएं आम हो जाती हैं
- बार-बार गैस और पेट फूलना
- एसिड रिफ्लक्स और जलन
- कब्ज या कभी-कभी दस्त
- भारीपन और अपच महसूस होना
- भूख कम लगना या अनियंत्रित खाना
एक्सपर्ट का सुझाव: तनाव को हल्के में न लें
क्रॉनिक स्ट्रेस सिर्फ मानसिक नहीं, बल्कि शारीरिक बीमारियों की जड़ बन सकता है। अगर आप लंबे समय से तनाव में हैं और पेट की ये समस्याएं बार-बार हो रही हैं, तो इसे इग्नोर न करें। छोटे-छोटे कदम जैसे गहरी सांस, मेडिटेशन, नियमित व्यायाम, समय पर खाना, अच्छी नींद और किसी से बात करना – ये सब आपके गट और दिमाग दोनों को राहत दे सकते हैं।
आपके स्वास्थ्य के लिए यही सबसे बड़ा उपाय है – तनाव को मैनेज करना। क्योंकि जब दिमाग शांत होगा, तो पेट भी शांत रहेगा।
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मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।









