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एक जिला सहकारी बैंक और 3 NBFC पर लाखों का जुर्माना, 35 NBFC का लाइसेंस रद्द – आपके अकाउंट पर क्या असर?

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एक जिला सहकारी बैंक और 3 NBFC पर लाखों का जुर्माना, 35 NBFC का लाइसेंस रद्द – आपके अकाउंट पर क्या असर?

NBFC License Cancelled | जनवरी 2026 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने वित्तीय क्षेत्र में अनुशासन बनाए रखने के लिए लगातार कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश के जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, मऊ पर केवाईसी नियमों के उल्लंघन के लिए 2 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया है। साथ ही तीन NBFC पर भी पेनल्टी लगाई गई है, जबकि 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) का सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) रद्द कर दिया गया है।

बैंक पर जुर्माना: जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, मऊ (उत्तर प्रदेश)

  • जुर्माना राशि: 2 लाख रुपये।
  • कारण:
    • खातों की जोखिम वर्गीकरण (Risk Categorisation) की आवधिक समीक्षा के लिए सिस्टम लागू नहीं किया, जो कम से कम हर 6 महीने में अनिवार्य है।
    • ग्राहकों के KYC अपडेट निर्धारित समय में नहीं किए।
  • यह कमी NABARD के मार्च 2024 निरीक्षण में सामने आई थी।
  • RBI ने स्पष्ट किया है कि यह पेनल्टी केवल अनुपालन की कमी पर आधारित है, ग्राहकों के लेन-देन या खातों की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

तीन NBFC पर पेनल्टी

RBI ने इन कंपनियों पर नियम तोड़ने के लिए जुर्माना लगाया:

  • संख्या फाइनेंशियल सर्विसेस लिमिटेड (मुंबई): 40,000 रुपये – एक नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) को अयोग्य इकाई को सौंपने का उल्लंघन।
  • शाहा फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड: फेयर प्रैक्टिसेस कोड के अनुपालन की समय-समय पर समीक्षा के लिए सिस्टम न लागू करने पर पेनल्टी।
  • पिंकल कैपिटल सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड (झारखंड): 1 लाख रुपये – लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर से डिफॉल्ट लॉस गारंटी ली, जो बकाया लोन पोर्टफोलियो की राशि से 5% अधिक थी।

35 NBFC का CoR रद्द – बड़े पैमाने पर कार्रवाई

  • RBI ने RBI एक्ट, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत 35 NBFC का रजिस्ट्रेशन रद्द किया है (यह कार्रवाई दिसंबर 2025 के अंत में प्रभावी हुई, जनवरी 2026 में घोषित)।
  • मुख्य कारण: लगातार नियामकीय अनुपालन में विफलता, मूल रजिस्ट्रेशन शर्तों का पालन न करना, या NBFC बिजनेस बंद करना।
  • भौगोलिक वितरण: अधिकांश (34) दिल्ली/NCR में, एक जबलपुर (मध्य प्रदेश) में – सत्य प्रकाश कैपिटल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड
  • अन्य प्रमुख नाम: AG Securities, ALB Leasing & Finance, ATM Credit & Investments, Pearls Hire Purchase Corporation, Quasar India Fincap आदि।
  • साथ ही 16 NBFC ने स्वेच्छा से अपना CoR सरेंडर किया, जिसके बाद रद्द किया गया।
  • सकारात्मक कदम: देहरादून की सोशल लीजिंग इंडिया लिमिटेड का लाइसेंस अपील/कोर्ट आदेश पर बहाल किया गया।
  • इन कंपनियों को अब नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के रूप में कोई बिजनेस करने की अनुमति नहीं।

ग्राहकों/निवेशकों पर क्या असर?

RBI ने स्पष्ट किया है कि इन कार्रवाइयों (पेनल्टी या CoR रद्द) से ग्राहकों के खातों, लोन या डिपॉजिट पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रभावित NBFC पहले से ही सक्रिय नहीं थीं या अनुपालन में कमजोर थीं। फिर भी, सलाह है कि किसी भी फाइनेंशियल कंपनी के साथ डील करने से पहले RBI की आधिकारिक वेबसाइट (rbi.org.in) पर उसका रजिस्ट्रेशन चेक करें।

यह कार्रवाई RBI की सख्ती दर्शाती है, ताकि वित्तीय प्रणाली मजबूत और सुरक्षित बनी रहे।


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