Susner News today शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस गणेश विवाह का हुआ भव्य आयोजन, भक्तों ने छप्पन भोग लगाया

  • कथा के दौरान गो माता को राष्ट्र माता बनाने के लिए संकल्प दिलाया,सरकार से मांग की

सुसनेर। नगर के मेला ग्राउंड स्थित श्री ओंकारेश्वर महादेव एवं श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित भव्य शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण वातावरण में भगवान गणेश के पावन विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इस अवसर पर भगवान गणेश को छप्पन भोग अर्पित किए गए, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने।

कथा स्थल पर वेद मंत्रोच्चार, शंख-नाद और “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष से सम्पूर्ण परिसर भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में नगरवासी एवं आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु भगवान गणेश जी ओर माता रिद्धि सिद्धि के विवाह के साक्षी बने।

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कथा का वाचन करते हुए प्रसिद्ध कथावाचक पं. मनमोहन कश्यप ने कहा कि भगवान गणेश का विवाह जीवन में शुभता, समृद्धि और विघ्नों के नाश का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि गणेश विवाह से यह संदेश मिलता है कि श्रद्धा, संयम और धर्म के मार्ग पर चलकर जीवन के सभी संकटों से मुक्ति पाई जा सकती है।

पं. कश्यप ने कहा कि छप्पन भोग भगवान को समर्पण और भक्ति का प्रतीक है, जिसमें अन्न, फल, मिष्ठान और विविध व्यंजनों के माध्यम से भक्त अपने भाव अर्पित करते हैं। छप्पन भोग दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

गणेश विवाह की झांकी, पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार, देव-गणों की झलक और भजन-कीर्तन ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, वहीं बच्चों एवं युवाओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम के दौरान आयोजक समिति के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से नगर व प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। कथा के अंत में महाआरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

कथा वाचक पंडित जी ने गो माता को राष्ट्र माता घोषित करने का किया आह्वान, भक्तों को दिलाया संकल्प

शिवमहापुराण कथा के दौरान कथा वाचक पंडित मनमोहन कश्यप ने देश की राजनीति और सामाजिक सरोकारों पर तीखा संदेश देते हुए कहा कि “देश में 60 साल कांग्रेस और 15 साल भाजपा की सरकारें रहीं, लेकिन आज तक गो माता को राष्ट्र माता घोषित नहीं किया गया।” उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए समाज से जागरूक होने का आह्वान किया।

कथा वाचन के दौरान पंडित जी ने कहा कि गो माता भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसके बावजूद आज भी गो संरक्षण और सम्मान को वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसकी वह अधिकारी है। उन्होंने सरकारों से मांग की कि गो माता को विधिवत राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाए।

इस अवसर पर पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं को पंडित जी ने गो माता को राष्ट्र माता घोषित कराने के लिए संकल्प दिलवाया। आगामी दिनों में गौ माता को राष्ट्र माता की मांग को लेकर जानकारी दी ,श्रद्धालुओं ने एक स्वर में गो सेवा, गो संरक्षण और इस विषय को समाज व शासन तक पहुंचाने का प्रण लिया।

कार्यक्रम के अंत में “गो माता की जय” के नारों से पंडाल गूंज उठा और वातावरण धर्ममय हो गया। कथा के माध्यम से दिया गया यह संदेश श्रद्धालुओं में नई चेतना और जागरूकता का संचार करता नजर आया।

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