आज संसद परिसर से जुड़ा एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया जिसने माहौल को और ज्यादा गरमा दिया। राहुल गांधी पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की किताब लेकर संसद पहुंचे और सरकार पर सीधे सवाल खड़े कर दिए। इसी दौरान केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के साथ उनकी तीखी बहस भी देखने को मिली।
नरवणे की किताब लेकर संसद पहुंचे राहुल गांधी
पिछले दो दिनों से संसद में जिस किताब को लेकर विवाद चल रहा है राहुल गांधी बुधवार को वही किताब हाथ में लेकर पहुंचे। उन्होंने किताब का वह पन्ना खोलकर दिखाया जिसमें कथित तौर पर प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख के बीच हुई बातचीत का जिक्र है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार और रक्षा मंत्री यह कह रहे हैं कि ऐसी कोई किताब मौजूद नहीं है लेकिन यह किताब सच्चाई सामने रखती है।

प्रधानमंत्री को किताब देने की बात कही
राहुल गांधी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री आज लोकसभा में आते हैं तो वह खुद जाकर यह किताब उन्हें देंगे। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री को इसे पढ़ना चाहिए ताकि देश को सच्चाई पता चल सके। राहुल कहा कि उन्हें नहीं लगता कि प्रधानमंत्री आज सदन में आने की हिम्मत करेंगे।
लोकसभा में किताब पढ़ने की नहीं मिली अनुमति
राहुल गांधी इस किताब के कुछ अंश लोकसभा में पढ़ना चाहते थे। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसी मुद्दे पर पिछले दो दिनों से सदन में बार बार हंगामा हुआ और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
मकर द्वार पर राहुल और बिट्टू आमने सामने
संसद के मकर द्वार के पास उस समय माहौल और तनावपूर्ण हो गया जब राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू आमने सामने आए। राहुल गांधी ने बिट्टू को देखकर गद्दार दोस्त कह दिया और हाथ मिलाने की पेशकश की। राहुल ने कहा कि चिंता मत करो तुम वापस आ जाओगे।
बिट्टू का पलटवार राहुल को बताया देश का दुश्मन
रवनीत सिंह बिट्टू ने राहुल गांधी से हाथ नहीं मिलाया। उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि देश के दुश्मनों से उनका कोई लेना देना नहीं है। इस बयान के बाद दोनों के बीच कुछ देर तक बहस होती रही और आसपास मौजूद सांसद भी इसे देखते रहे।
बिट्टू का राजनीतिक सफर और पुराना विवाद
रवनीत सिंह बिट्टू पहले कांग्रेस में थे और तीन बार सांसद रह चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा जॉइन की। चुनाव हारने के बावजूद उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया गया और केंद्र सरकार में मंत्री पद दिया गया। इससे पहले भी वे राहुल गांधी को लेकर तीखे बयान दे चुके हैं।
बयानबाजी से और गरमाया माहौल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद संसद का माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। एक तरफ किताब को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो दूसरी तरफ नेताओं की बयानबाजी ने सियासत को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बहस और बढ़ सकती है।
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