उज्जैन की पावन धरती एक बार फिर भारतीय संस्कृति, परंपरा और इतिहास के विराट उत्सव की साक्षी बनने जा रही है। विक्रमोत्सव 2026 का शुभारंभ 12 फरवरी से होगा, जो पूरे 139 दिनों तक, यानी 30 जून तक चलेगा। यह आयोजन केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक चेतना को नई दिशा देने वाला महाअभियान होगा। इस लंबे आयोजन में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के कलाकार, विद्वान और सांस्कृतिक प्रेमी सहभागी बनेंगे।
विक्रमोत्सव 2026: परंपरा और गौरव का उत्सव
संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला के अनुसार, इस महोत्सव के अंतर्गत चार हजार से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को भारतीय संस्कृति की गहराइयों से परिचित कराएंगे। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम द्वारा ‘शिवोऽहम महादेव’ की विशेष आराधना प्रस्तुति दी जाएगी, जो इस उत्सव का आध्यात्मिक शिखर होगी।
देव महादेव पर्व और शिवालयों की सांस्कृतिक छटा
मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि देव महादेव पर्व के अंतर्गत प्रदेश के 60 से अधिक प्रमुख शिव मंदिरों में मेले आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में मंदिरों की भव्य साज-सज्जा, स्वच्छता अभियान और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे।
अंतरराष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव का आयोजन
विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत 13 से 17 मार्च तक उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इसमें 25 से अधिक देशों की फिल्मों का प्रदर्शन होगा। महाभारत पर आधारित फिल्मों सहित अनेक भाषाओं की पौराणिक कृतियां दर्शकों को भारतीय कथा परंपरा से वैश्विक स्तर पर जोड़ेंगी।
सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण: देश का सबसे बड़ा सम्मान
सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति और उनके आदर्शों को जीवंत रखने के उद्देश्य से एक करोड़ एक लाख रुपये का अंतरराष्ट्रीय सम्मान स्थापित किया गया है। इसके साथ ही 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय सम्मान और तीन राज्य स्तरीय सम्मान भी प्रदान किए जाएंगे। पुरस्कार विजेताओं का चयन एक विशेष समिति द्वारा किया जाएगा।
read also: आज का राशिफल 8 फरवरी 2026: सितारों का बड़ा संकेत, मेष–सिंह चमकेंगे, मीन वालों के लिए चेतावनी!










