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इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में 2 लाख करोड़ निवेश, फिर भी 2030 लक्ष्य दूर

इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में 2 लाख करोड़ निवेश, फिर भी 2030 लक्ष्य दूर
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भारत का इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र पिछले पांच वर्षों में रिकॉर्ड पूंजी निवेश आकर्षित करने में सफल रहा है, लेकिन 2030 के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। ऊर्जा अर्थशास्त्र और वित्तीय विश्लेषण संस्थान (IEEFA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा निवेश कुल जरूरत का केवल एक छोटा हिस्सा ही पूरा कर पा रहा है।

रिपोर्ट बताती है कि 2020 से 2025 के बीच इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में 2.23 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ। हालांकि, 2030 तक निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कुल 12.5 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। इसका अर्थ है कि अभी लगभग 10.2 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी जुटानी होगी।

इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में निवेश का आकलन और चुनौतियां

IEEFA की रिपोर्ट ‘कैपिटल फ्लोज इन इंडिया’s इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्ट सेक्टर’ में पहली बार 2020-2025 के बीच हुए वास्तविक निवेश का समेकित विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन के अनुसार, निवेश का बड़ा हिस्सा विनिर्माण क्षमता बढ़ाने में गया, जबकि शेष राशि सार्वजनिक सब्सिडी, प्रोत्साहन योजनाओं और ईवी चार्जिंग अवसंरचना पर खर्च हुई।

रिपोर्ट के सह-लेखक शुभम श्रीवास्तव के मुताबिक, 2.23 लाख करोड़ रुपये की पूंजी पांच वर्षों में जुटाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन यह 2030 तक आवश्यक कुल निवेश का केवल 18 प्रतिशत है। शेष पूंजी जुटाने के लिए व्यापक वित्तीय सुधार और संगठित निवेश ढांचे की जरूरत होगी।

आंतरिक संसाधन बनाम बाहरी पूंजी

विश्लेषण से पता चलता है कि इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में विनिर्माण निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा कंपनियों के आंतरिक संसाधनों से आया, जो लगभग 1.59 लाख करोड़ रुपये रहा। इसके अलावा 36,000 करोड़ रुपये से अधिक कर्ज और 6,400 करोड़ रुपये से ज्यादा इक्विटी निवेश भी दर्ज किया गया।

हालांकि, यह समग्र तस्वीर विभिन्न वाहन खंडों के बीच अंतर को पूरी तरह नहीं दर्शाती। बाजार संरचना, पूंजी की तीव्रता और कंपनियों की प्रकृति के आधार पर वित्तपोषण का पैटर्न अलग-अलग रहा।

तीन पहिया से चार पहिया वाहनों की ओर बढ़ता रुझान

2020 से 2025 के दौरान इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन खंड ने कुल निवेश का लगभग 78 प्रतिशत हिस्सा आकर्षित किया। यह खंड व्यावसायिक स्तर पर परिपक्व माना जाता है और इसमें कई छोटे निर्माताओं की सक्रिय भागीदारी है।

हालांकि, 2024 और 2025 में हालिया निवेश घोषणाएं इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों की ओर झुकाव दर्शाती हैं। इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग ने निवेशकों को इस सेगमेंट में अधिक पूंजी लगाने के लिए प्रेरित किया है। दो पहिया और चार पहिया वाहन खंड में अपेक्षाकृत विविध वित्तीय मॉडल देखने को मिले हैं, जहां कर्ज और इक्विटी दोनों का संतुलित उपयोग हुआ।

2030 लक्ष्य के लिए जरूरी सुधार

भारत ने 2030 तक निजी कारों की कुल बिक्री में 30 प्रतिशत, वाणिज्यिक वाहनों में 70 प्रतिशत, बसों में 40 प्रतिशत और दो व तीन पहिया वाहनों में 80 प्रतिशत इलेक्ट्रिक हिस्सेदारी का लक्ष्य तय किया है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में दीर्घकालिक और स्थिर निवेश नीति आवश्यक होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी नीतियों, निजी निवेश और वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल से ही शेष पूंजी जुटाई जा सकती है। यदि समय रहते निवेश अंतर को पाटा नहीं गया, तो 2030 के लक्ष्य चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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