संवाददाता: अक्षय राठौर, सुसनेर। होली के दूसरे दिन धुलेंडी के साथ ही नगर में शीतला माता की पूजा का पावन क्रम शुरू हो गया। आस्था और परंपरा के संगम के बीच मातृशक्ति द्वारा श्रद्धाभाव से शीतल जल अर्पित किया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में महिलाओं की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं और पूरा वातावरण भक्ति व जयकारों से गूंज रहा है।
धुलेंडी से शुरू हुई शीतला माता की पूजा की सात दिवसीय परंपरा
प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी धुलेंडी से शीतला माता की पूजा का आयोजन प्रारंभ हुआ है, जो शीतला सप्तमी तक सात दिनों तक चलता है। नगर के मेला ग्राउंड स्थित शीतला माता मंदिर में प्रतिदिन प्रातःकाल महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु महिलाएं तड़के मंदिर पहुंचकर माता को ठंडा जल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना कर रही हैं।
सप्तमी के दिन विशेष रूप से शीतला माता की पूजा कर शीतल भोग अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन की पूजा से घर-परिवार में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है। इसी विश्वास के साथ मातृशक्ति पूरे उत्साह से पूजा-अर्चना में सहभागी बन रही है।
कंठल नदी स्थित प्राचीन मंदिर में बढ़ी श्रद्धालुओं की आस्था
कंठल नदी किनारे स्थित वर्षों पुराने शीतला माता मंदिर में भी इन दिनों श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। नगर का प्रमुख स्थल होने के कारण यहां शीतला माता की पूजा के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं नियमित रूप से पहुंच रही हैं। जनसहयोग से लाखों रुपए की लागत से मंदिर निर्माण कार्य भी प्रगति पर है, जिससे श्रद्धालुओं में और अधिक उत्साह देखने को मिल रहा है।
आज से पूजा प्रारंभ होने के साथ ही मंदिर परिसर में विशेष चहल-पहल दिखाई दी। जयकारों और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। शीतला माता की पूजा के इस आयोजन ने नगर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है और श्रद्धालुओं के चेहरे पर आस्था की चमक साफ नजर आ रही है।











