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ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर फैल रहे एआई फेक वीडियो

ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर फैल रहे एआई फेक वीडियो
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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एआई फेक वीडियो तेजी से फैल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन एआई फेक वीडियो के कारण वास्तविक घटनाओं और झूठी सामग्री के बीच अंतर करना आम यूजर्स के लिए मुश्किल हो गया है। एलन मस्क के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर भी ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें युद्ध से जुड़ी नकली तस्वीरें और दृश्य दिखाए जा रहे हैं।

एआई फेक वीडियो से युद्ध से जुड़ी गलत जानकारी फैलने का खतरा

शोधकर्ताओं के अनुसार एआई फेक वीडियो में अमेरिकी सैनिकों को ईरान द्वारा पकड़े जाने, इजरायल के शहरों के खंडहर बनने और अमेरिकी दूतावासों में आग लगने जैसे दृश्य दिखाए गए हैं। ये वीडियो इतने वास्तविक दिखते हैं कि कई लोग इन्हें सच मान लेते हैं।

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के दौरान इस तरह के एआई फेक वीडियो की संख्या पहले के किसी भी संघर्ष से ज्यादा बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर वास्तविक तस्वीरों और एआई से बनाए गए वीडियो के मिश्रण ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

एक्स प्लेटफॉर्म ने लागू की नई नीति

गलत जानकारी को रोकने के लिए एक्स प्लेटफॉर्म ने नई नीति लागू की है। प्लेटफॉर्म के प्रोडक्ट हेड निकिता बीयर ने चेतावनी दी है कि एआई से बने भ्रामक कंटेंट को साझा करने वाले खातों पर कार्रवाई की जाएगी।

नई नीति के तहत ऐसे खातों की कमाई बंद की जा सकती है और बार-बार नियम तोड़ने पर स्थायी निलंबन भी किया जा सकता है। एक्स की यह नीति उस समय सामने आई है जब प्लेटफॉर्म पर फर्जी जानकारी फैलने को लेकर लगातार आलोचना हो रही थी।

शोधकर्ताओं ने नीति की प्रभावशीलता पर उठाए सवाल

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि एआई फेक वीडियो पर रोक लगाने की कोशिश अभी भी पर्याप्त नहीं है। इंस्टिट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक डायलॉग के शोधकर्ता जो बोडनार के अनुसार सोशल मीडिया फीड अब भी युद्ध से जुड़े एआई फेक वीडियो से भरे हुए हैं।

उन्होंने बताया कि कई प्रीमियम अकाउंट, जिन पर ब्लू चेकमार्क होता है और जो कमाई के पात्र होते हैं, ऐसे वीडियो साझा कर रहे हैं। इनमें से कुछ पोस्ट लाखों व्यूज हासिल कर चुके हैं।

फैक्ट चेकर्स के लिए बढ़ी चुनौती

दुनिया भर के फैक्ट चेकिंग नेटवर्क ने पाया कि ईरान-अमेरिका युद्ध से जुड़े एआई फेक वीडियो की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें कई वीडियो ऐसे हैं जो अमेरिकी सैनिकों को बंदी दिखाते हैं या युद्ध के बड़े विनाश का दृश्य प्रस्तुत करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई तकनीक इतनी तेज़ी से विकसित हो रही है कि पेशेवर फैक्ट-चेकर्स के लिए भी इन एआई फेक वीडियो को तुरंत पहचानना मुश्किल हो रहा है।

एआई तकनीक और कमाई मॉडल बना रहे समस्या

विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर एआई फेक वीडियो के बढ़ने के पीछे आर्थिक कारण भी हैं। एक्स प्लेटफॉर्म पर प्रीमियम अकाउंट्स को एंगेजमेंट के आधार पर कमाई का मौका मिलता है, जिससे सनसनीखेज या भ्रामक कंटेंट साझा करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

कुछ मामलों में एआई से बने वीडियो को स्पष्ट रूप से लेबल करने के निर्देश भी नजरअंदाज किए गए हैं। ऐसे कई पोस्ट अब भी ऑनलाइन मौजूद हैं और लाखों व्यूज हासिल कर चुके हैं।

भविष्य में और बढ़ सकती है चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एआई फेक वीडियो पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लगाया गया तो भविष्य के संघर्षों में गलत जानकारी का खतरा और बढ़ सकता है। तकनीक के तेजी से विकास के कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और फैक्ट चेकिंग संस्थाओं के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान सामने आए एआई फेक वीडियो ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल युग में सूचना की विश्वसनीयता बनाए रखना पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गया है।

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