भोपाल में पानी पूरी संकट तेजी से गहराता जा रहा है। शहर की मशहूर स्ट्रीट फूड संस्कृति इस समय गैस सिलेंडर की कमी से बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बाजारों और मुख्य सड़कों पर देर रात तक दिखने वाले पानी पूरी के ठेले अब धीरे-धीरे गायब होते नजर आ रहे हैं। गैस की कमी के कारण कई विक्रेताओं को अपना कारोबार बंद करना पड़ा है, जबकि कुछ दुकानदार केवल सीमित समय के लिए ही ठेले खोल पा रहे हैं। इस स्थिति से न केवल व्यापारियों की आय प्रभावित हुई है बल्कि ग्राहकों की पसंदीदा चाट का स्वाद भी फीका पड़ता दिखाई दे रहा है।
भोपाल में पानी पूरी संकट का मुख्य कारण गैस सिलेंडर की कमी
भोपाल में पानी पूरी संकट की सबसे बड़ी वजह व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी बताई जा रही है। स्थानीय गैस वितरकों के अनुसार हाल के दिनों में आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण शहर में सिलेंडरों का स्टॉक जल्दी खत्म हो गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और आपूर्ति में आई रुकावटों का असर अब छोटे कारोबारियों तक पहुंच चुका है।
कई छोटे फूड वेंडर्स का कहना है कि उन्हें समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में वे या तो अपने ठेले बंद करने को मजबूर हैं या फिर सीमित मात्रा में ही सामान तैयार कर पा रहे हैं। इससे उनकी दैनिक आय में भारी गिरावट आई है।
शहर के प्रमुख बाजारों में कम हुए पानी पूरी के ठेले
भोपाल के कोलार, जवाहर चौक, भेल क्षेत्र और अन्य व्यस्त बाजारों में पहले जहां शाम होते ही पानी पूरी के ठेले ग्राहकों से घिरे रहते थे, वहीं अब कई जगह ठेले बंद दिखाई देते हैं। कुछ विक्रेता केवल शाम के पीक समय में ही कुछ घंटों के लिए ठेला लगा रहे हैं।
जवाहर चौक के पानी पूरी विक्रेता पुखराज बताते हैं कि वे पिछले बीस वर्षों से इस व्यवसाय में हैं, लेकिन ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी। उनका कहना है कि गैस सिलेंडर की कमी के कारण वे एक बार में पानी पूरी तलने के लिए पर्याप्त तेल तक गर्म नहीं कर पा रहे हैं।
थोक विक्रेताओं पर भी पड़ा असर
भोपाल में पानी पूरी संकट का असर केवल ठेले वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि थोक आपूर्तिकर्ताओं को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पानी पूरी के बड़े सप्लायर रतिराम का कहना है कि उन्हें अपनी उत्पादन क्षमता लगभग 40 प्रतिशत तक कम करनी पड़ी है।
उनका कहना है कि व्यावसायिक एलपीजी की कमी के कारण पहले जितनी मात्रा में पानी पूरी तैयार की जाती थी, अब उतनी बनाना संभव नहीं है। इससे खुदरा विक्रेताओं की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।
ग्राहकों की जेब पर भी बढ़ा बोझ
भोपाल में पानी पूरी संकट का असर अब सीधे ग्राहकों की जेब पर भी पड़ने लगा है। कई जगहों पर पानी पूरी की कीमतें बढ़कर 10 रुपये से 15 या 20 रुपये प्रति प्लेट तक पहुंच गई हैं।
छात्रों और रोज कमाने-खाने वाले लोगों के लिए यह सस्ता और लोकप्रिय नाश्ता अब धीरे-धीरे महंगा होता जा रहा है। विक्रेताओं का कहना है कि बढ़ती कीमतों और सीमित उपलब्धता के कारण ग्राहकों की संख्या भी कम हो गई है।
रोजी-रोटी पर मंडराने लगा संकट
लिली स्क्वायर के पास ठेला लगाने वाले बाबूलाल का कहना है कि अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कई परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट आ सकता है। स्ट्रीट फूड का यह छोटा कारोबार शहर में हजारों लोगों की आय का प्रमुख साधन है।
विक्रेताओं का मानना है कि यदि जल्द ही गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो भोपाल में पानी पूरी संकट और गहरा सकता है। इससे न केवल छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा बल्कि शहर की लोकप्रिय स्ट्रीट फूड संस्कृति भी प्रभावित हो सकती है।
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