दुनिया इस समय एक ऐसे संकट से गुजर रही है जिसने हर देश की चिंता बढ़ा दी है. ईरान इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ा युद्ध अब 21वें दिन में पहुंच चुका है और हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक बड़े वैश्विक खतरे का रूप ले चुका है.
कतर में अमेरिकी रडार पर हमला और बड़ा नुकसान
इस युद्ध का सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ईरान ने कतर में स्थित अमेरिका के बेहद महत्वपूर्ण AN FPS 132 अर्ली वार्निंग रडार को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया. यह रडार खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल डिफेंस सिस्टम की रीढ़ माना जाता था. इसकी कीमत करीब 9100 करोड़ रुपये बताई जा रही है. सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिखा है कि अल उदेद एयरबेस के पास मौजूद इस रडार को भारी नुकसान पहुंचा है.
F 35 लड़ाकू विमान को लेकर बड़ा दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने दुनिया के सबसे एडवांस लड़ाकू विमान F 35 को नुकसान पहुंचाया है. इस दावे के साथ एक वीडियो भी जारी किया गया है. वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह स्वीकार किया है कि एक F 35 जेट को मिशन के दौरान इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. इससे युद्ध की गंभीरता और भी बढ़ गई है.
इजरायल की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा असर
इस संघर्ष का असर इजरायल पर भी साफ दिखाई दे रहा है. खबर है कि वहां की एक बड़ी रिफाइनरी पर भारी बमबारी हुई है जिससे आर्थिक नुकसान हुआ है. लगातार हमलों के कारण उद्योग और ऊर्जा सेक्टर पर दबाव बढ़ रहा है.
LNG संकट से पूरी दुनिया पर खतरा
इस युद्ध का सबसे भयावह असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है. कतर एनर्जी के मुताबिक ईरानी हमलों के कारण LNG एक्सपोर्ट का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है. इससे हर साल लगभग 20 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं जिससे यूरोप और एशिया में सप्लाई का संकट गहराता जा रहा है.
दुनिया भर के नेता सक्रिय और बढ़ी चिंता
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएई के राष्ट्रपति से बात कर हमलों की निंदा की है और सुरक्षा के लिए एकजुटता दिखाई है. वहीं फ्रांस के विदेश मंत्री अचानक इजरायल दौरे पर जा रहे हैं ताकि युद्धविराम की संभावनाएं तलाश की जा सकें.
क्या बढ़ सकता है वैश्विक संकट
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर यह युद्ध इसी तरह जारी रहा तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा. ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकती है. ऐसे में हर देश की नजर अब इस बात पर है कि यह संघर्ष कब और कैसे थमेगा.









