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उज्जैन छात्र पिटाई मामला, वायरल वीडियो के बाद शिक्षक पर केस दर्ज

उज्जैन छात्र पिटाई मामला, वायरल वीडियो के बाद शिक्षक पर केस दर्ज
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उज्जैन छात्र पिटाई मामला सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक शिक्षक को छात्र को बेरहमी से डंडे से पीटते हुए देखा गया। यह घटना उज्जैन के महर्षि सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान द्वारा संचालित एक आवासीय विद्यालय की बताई जा रही है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

उज्जैन छात्र पिटाई मामला में क्या है पूरा घटनाक्रम

उज्जैन छात्र पिटाई मामला से जुड़े इस वीडियो की अवधि करीब 51 सेकंड बताई जा रही है। वीडियो में शिक्षक एक छात्र को बार-बार डंडे से मारते हुए नजर आ रहा है और उससे सवाल पूछ रहा है कि वह दूसरे छात्र के बिस्तर पर क्यों सोया। छात्र दर्द से तड़पता हुआ दिखाई देता है, लेकिन शिक्षक लगातार मारता रहता है।

हैरानी की बात यह है कि कमरे में मौजूद अन्य लोग इस घटना को देखते रहे, लेकिन किसी ने भी हस्तक्षेप नहीं किया।

उज्जैन छात्र पिटाई मामला में आरोपी शिक्षक की पहचान

उज्जैन छात्र पिटाई मामला में सामने आए वीडियो के आधार पर आरोपी शिक्षक की पहचान दत्तादास शेवड़े के रूप में हुई है, जो संस्थान में सामवेद पढ़ाते हैं। यह घटना 15 मार्च की रात की बताई जा रही है, जब छात्र को सोते हुए उठाकर कार्यालय में बुलाया गया और कथित रूप से पीटा गया।

उज्जैन छात्र पिटाई मामला में पुलिस की कार्रवाई

उज्जैन छात्र पिटाई मामला को गंभीरता से लेते हुए चिंतामन थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी हेमराज यादव के अनुसार, वायरल वीडियो की पुष्टि की जा रही है और संबंधित शिक्षक तथा छात्र के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 और 296 के तहत तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उज्जैन छात्र पिटाई मामला पर संस्थान की चुप्पी

उज्जैन छात्र पिटाई मामला सामने आने के बाद संस्थान की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। संस्थान के सचिव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

उज्जैन छात्र पिटाई मामला क्या देता है संकेत

उज्जैन छात्र पिटाई मामला यह दर्शाता है कि शिक्षा संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस तरह की घटनाएं न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालती हैं।

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