सोलर बंडलिंग मॉडल के जरिए महाराष्ट्र में बिजली क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) ने 2500 मेगावाट राउंड-द-क्लॉक बिजली खरीदने की योजना बनाई है, जिसे महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (MERC) की मंजूरी मिल चुकी है। सोलर बंडलिंग मॉडल के तहत यह कदम राज्य में स्थिर और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सोलर बंडलिंग मॉडल क्या है और कैसे करेगा काम
सोलर बंडलिंग मॉडल के अंतर्गत 5000 मेगावाट सौर ऊर्जा को अन्य स्रोतों जैसे स्टोरेज या गैर-नवीकरणीय ऊर्जा के साथ जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि दिन में मिलने वाली अतिरिक्त सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग हो सके और रात या कम उत्पादन के समय भी बिजली की सप्लाई बाधित न हो। सोलर बंडलिंग मॉडल अस्थिर नवीकरणीय ऊर्जा को स्थिर और भरोसेमंद बिजली में बदलने का प्रभावी तरीका माना जा रहा है।
बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने की तैयारी
सोलर बंडलिंग मॉडल के जरिए महाराष्ट्र सरकार भविष्य की बढ़ती बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कदम उठा रही है। अनुमान है कि राज्य की पीक बिजली मांग 2029-30 तक लगभग 33 गीगावाट तक पहुंच सकती है। डेटा सेंटर और अन्य बड़े उद्योगों में 24 घंटे बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसे यह मॉडल पूरा करने में मदद करेगा।
51 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय स्रोतों से होगी
सोलर बंडलिंग मॉडल के तहत कुल आपूर्ति की गई बिजली में कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा का होगा। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि बड़े उपभोक्ताओं के लिए ग्रीन एनर्जी की आवश्यकता भी पूरी होगी। बाकी बिजली गैर-नवीकरणीय स्रोतों या स्टोरेज के जरिए दी जाएगी ताकि सप्लाई निरंतर बनी रहे।
टैरिफ संरचना में बड़ा बदलाव
सोलर बंडलिंग मॉडल के तहत पारंपरिक दो-भाग टैरिफ की जगह 25 साल के लिए एकल टैरिफ लागू किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को निश्चित दर पर बिजली मिलेगी और डेवलपर्स पर लागत बढ़ने का जोखिम रहेगा। यह बदलाव बिजली क्षेत्र में स्थिरता और पारदर्शिता लाने में मदद करेगा।
सप्लाई नियमों में राहत और बड़ी बोली प्रक्रिया
सोलर बंडलिंग मॉडल को सफल बनाने के लिए सप्लाई शर्तों में भी बदलाव किया गया है। वार्षिक सप्लाई सीमा 80 प्रतिशत और मासिक 70 प्रतिशत रखी गई है, जबकि पीक समय में 90 प्रतिशत सप्लाई अनिवार्य होगी। इसके साथ ही न्यूनतम बोली क्षमता को 1250 मेगावाट और 2500 मेगावाट तक बढ़ाया गया है, जिससे बड़े निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।
ऊर्जा क्षेत्र में नई दिशा की ओर कदम
सोलर बंडलिंग मॉडल महाराष्ट्र के ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। इससे राज्य को न केवल सस्ती और निरंतर बिजली मिलेगी, बल्कि 2035-36 तक 65 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिलेगी। यह पहल देश में ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन को भी मजबूती दे सकती है।
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