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वंदे मातरम विवाद इंदौर में भड़का, राष्ट्रगीत गाने से इनकार पर मचा बवाल, सियासी संग्राम तेज

वंदे मातरम विवाद इंदौर में भड़का, राष्ट्रगीत गाने से इनकार पर मचा बवाल, सियासी संग्राम तेज
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मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम विवाद इंदौर ने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। बजट बैठक के दौरान दो कांग्रेस पार्षदों ने राष्ट्रगीत गाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया।

बताया जा रहा है कि पार्षदों ने अपने धार्मिक विश्वास का हवाला देते हुए कहा कि वे “वंदे मातरम” नहीं गा सकते। इस बयान के बाद माहौल अचानक गरमा गया और सत्ता पक्ष के पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया।

सदन में हंगामा

जैसे ही पार्षदों ने गाने से इनकार किया, भाजपा पार्षदों ने इसे राष्ट्रीय भावना का अपमान बताया और नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सदन की कार्यवाही बाधित हो गई।

चेयरमैन को हस्तक्षेप करना पड़ा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित पार्षद को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए गए।

धार्मिक कारण बने वजह

इन पार्षदों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके धर्म में “वंदे मातरम” गाना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इसमें ‘वंदे’ शब्द पूजा से जुड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि वे राष्ट्रगान और देशभक्ति गीतों का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी चीज को जबरन नहीं थोपा जा सकता।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस घटना के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने इसे राष्ट्र का अपमान बताया, वहीं कांग्रेस की ओर से इसे व्यक्तिगत और धार्मिक स्वतंत्रता का मामला बताया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अब स्थानीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है।

निष्कर्ष

वंदे मातरम विवाद इंदौर ने एक बार फिर राष्ट्रवाद और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में इस पर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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