दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्ट्रेशन में 29% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो साफ संकेत देती है कि लोग तेजी से EV की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसके बावजूद पेट्रोल वाहनों का दबदबा अभी भी कायम है।
यह ट्रेंड बताता है कि भारत का ऑटो बाजार अभी संक्रमण के दौर से गुजर रहा है, जहां नई तकनीक अपनाई जा रही है, लेकिन पुरानी व्यवस्था अभी भी मजबूत है।
इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्ट्रेशन 29% बढ़ा, आंकड़े क्या कहते हैं?
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में EV रजिस्ट्रेशन 2024-25 के 83,512 से बढ़कर 2025-26 में लगभग 1.07 लाख हो गया।
इसके साथ ही हाइब्रिड वाहनों में भी बढ़ोतरी देखी गई, जो 6,796 से बढ़कर 8,476 तक पहुंच गए। यह दर्शाता है कि लोग धीरे-धीरे क्लीन मोबिलिटी की ओर बढ़ रहे हैं।
पेट्रोल वाहनों का दबदबा क्यों बना हुआ है?
हालांकि EV की ग्रोथ तेज है, लेकिन पेट्रोल और पेट्रोल-एथेनॉल वाहनों की संख्या भी बढ़कर 5.30 लाख से 6.21 लाख तक पहुंच गई है।
इसका मतलब साफ है कि EV अपनाने के बावजूद पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों की हिस्सेदारी अभी भी बहुत बड़ी है। यही वजह है कि बाजार में उनका दबदबा कायम है।
अन्य फ्यूल सेगमेंट में भी बदलाव
दिल्ली में CNG वाहनों की संख्या 25,330 से बढ़कर 32,224 हो गई, जो अपेक्षाकृत साफ ईंधन की ओर झुकाव दिखाती है। वहीं डीजल वाहनों में गिरावट दर्ज की गई और यह संख्या घटकर 11,498 रह गई।
फॉसिल हाइब्रिड वाहनों में सबसे तेज वृद्धि देखी गई, जो दोगुने से भी ज्यादा बढ़े। इससे यह स्पष्ट है कि बाजार धीरे-धीरे मल्टी-फ्यूल ऑप्शन्स की ओर बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों की राय: EV बढ़े, लेकिन असर अभी सीमित
विशेषज्ञों का मानना है कि EV रजिस्ट्रेशन में तेज बढ़ोतरी के बावजूद यह अभी तक पेट्रोल और CNG वाहनों की संख्या को कम नहीं कर पाया है।
हालांकि, आने वाली EV नीति, टैक्स छूट और इंसेंटिव्स से भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी और तेजी से बढ़ सकती है।
भविष्य में क्या बदल सकता है?
नई EV नीति के तहत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे EV खरीदना और सस्ता होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में पेट्रोल वाहनों की ग्रोथ धीमी हो सकती है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहन तेजी से मुख्यधारा में शामिल होंगे।
निष्कर्ष
दिल्ली में EV रजिस्ट्रेशन की तेज वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन पेट्रोल वाहनों का दबदबा दिखाता है कि बदलाव अभी अधूरा है। इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्ट्रेशन बढ़ रहा है, लेकिन पूरी तरह बदलाव आने में अभी समय लगेगा।











