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AAP में बगावत पर बड़ा एक्शन! दल-बदल कानून के तहत बागी सांसदों की सदस्यता पर खतरा, ‘विलय’ का दावा कितने काम आएगा?

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नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) ने पार्टी से बगावत करने वाले सांसदों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी का कहना है कि बागी सांसदों की सदस्यता रद्द हो सकती है और इसके लिए जल्द ही औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, आम आदमी पार्टी का मानना है कि बागी सांसदों का मामला सीधे तौर पर संविधान की 10वीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के दायरे में आता है। पार्टी का दावा है कि केवल तीन सांसदों ने ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा है, जबकि दो-तिहाई समर्थन का दावा वास्तविकता से दूर है।

इसी आधार पर पार्टी इन सांसदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है और विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है।

सभापति को भेजा जाएगा पत्र

जानकारी के मुताबिक, पार्टी के चीफ व्हीप एनडी गुप्ता राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर बागी सांसदों—राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल—के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।

इस पत्र में दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की अपील की जाएगी।

भाजपा में शामिल हुए बागी सांसद

बताया जा रहा है कि पार्टी से इस्तीफा देने के बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ अन्य सांसद भी मौजूद रहे।

बागी गुट का दावा है कि उनके साथ दो-तिहाई से अधिक सांसद हैं, जिससे वे ‘विलय’ का लाभ ले सकते हैं। हालांकि AAP इस दावे को खारिज कर रही है।

‘ऑपरेशन लोटस’ का आरोप

आम आदमी पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों के दबाव के जरिए उनके नेताओं को तोड़ने की कोशिश की गई है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि यह कदम पंजाब सरकार को अस्थिर करने की साजिश का हिस्सा हो सकता है।

क्या ‘विलय’ बचा पाएगा बागी सांसदों को?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, दल-बदल कानून के तहत तभी राहत मिलती है जब कम से कम दो-तिहाई सांसद एक साथ किसी दूसरी पार्टी में विलय करें।

ऐसे में यदि यह संख्या पूरी नहीं होती है, तो बागी सांसदों की सदस्यता पर खतरा बना रह सकता है।

राजनीति में बढ़ी हलचल

इस घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद और कानूनी स्तर पर बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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