रेलवे में LPG की जगह PNG अपनाने का फैसला तेजी से लागू किया जा रहा है। पश्चिम एशिया संकट के चलते गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच भारतीय रेलवे ने क्रू रेस्टिंग रूम्स में एलपीजी सिलेंडर की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस का उपयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम सुरक्षा और निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
रेलवे में LPG की जगह PNG: सुरक्षा और स्थिरता पर जोर
रेलवे बोर्ड ने सभी ज़ोन को निर्देश दिया है कि जहां संभव हो, वहां एलपीजी के बजाय पीएनजी का उपयोग किया जाए। पाइप्ड गैस सिस्टम न केवल सुरक्षित माना जाता है, बल्कि इसमें सिलेंडर स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट से जुड़े जोखिम भी कम हो जाते हैं। इस बदलाव से रेलवे परिसरों में दुर्घटनाओं की संभावना को कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।
हाल के महीनों में एलपीजी से जुड़े हादसों और सप्लाई बाधाओं ने इस निर्णय को और जरूरी बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी का इस्तेमाल लंबे समय में अधिक सुरक्षित और किफायती विकल्प साबित हो सकता है।
पश्चिम एशिया संकट का असर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे भारत सहित कई देशों को गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है, ऐसे में किसी भी वैश्विक संकट का सीधा असर घरेलू सप्लाई पर पड़ता है। 1
इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने पहले ही वैकल्पिक उपायों पर काम शुरू कर दिया है, ताकि सेवाएं प्रभावित न हों और संचालन सुचारु बना रहे।
रेलवे में बदलाव से क्या होगा फायदा
पीएनजी के इस्तेमाल से रेलवे को कई स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे गैस की लगातार उपलब्धता बनी रहेगी और सिलेंडर पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, रखरखाव और संचालन लागत में भी कमी आ सकती है।
यह फैसला रेलवे के आधुनिकीकरण और ऊर्जा प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह के बदलाव अन्य क्षेत्रों में भी लागू किए जा सकते हैं।









