Trump Tariff Row को लेकर अमेरिका में बड़ा कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी व्यापार अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ को गैरकानूनी और अनुचित करार देते हुए बड़ा झटका दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद अमेरिकी व्यापार नीति और वैश्विक बाजारों पर इसके असर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार अदालत ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने कानून के तहत मिली शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया।
Trump Tariff Row में अदालत ने क्या कहा
न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड की तीन जजों वाली पीठ ने 2-1 के फैसले में कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत टैरिफ उचित नहीं थे। अदालत ने माना कि प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का इस्तेमाल उस तरीके से किया, जिसकी अनुमति कानून नहीं देता।
अदालत ने फिलहाल सीमित राहत देते हुए केवल कुछ कंपनियों और वॉशिंगटन राज्य को इन टैरिफ से छूट दी है। हालांकि ट्रंप प्रशासन इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।
छोटे कारोबारियों ने फैसले का किया स्वागत
इस मामले में खिलौना कंपनी Basic Fun! और मसाला आयातक Burlap & Barrel समेत कई छोटे कारोबारियों ने अदालत का रुख किया था। कंपनियों का कहना था कि इन टैरिफ के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ कंपनियां अब तक लाखों डॉलर अतिरिक्त शुल्क के रूप में चुका चुकी हैं।
कारोबारियों ने अदालत के फैसले को राहत भरा बताया है। उनका कहना है कि इससे छोटे व्यवसायों को बड़ी आर्थिक मार से बचाया जा सकेगा।
वैश्विक व्यापार और भारत पर क्या पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर अमेरिका के कई व्यापारिक साझेदार देशों पर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन ने पहले लगभग सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू करने की घोषणा की थी, जिसमें भारत भी शामिल था। अदालत के फैसले के बाद भविष्य की व्यापार वार्ताओं और शुल्क नीतियों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सभी आयातकों को तुरंत राहत मिलेगी या नहीं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार मामला अब अपील प्रक्रिया से गुजर सकता है और अंततः अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की संभावना भी है।
ट्रंप प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती
अमेरिकी अदालत का यह फैसला ट्रंप की व्यापार नीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे पहले भी अदालतें ट्रंप प्रशासन की कुछ टैरिफ नीतियों पर सवाल उठा चुकी हैं। अब प्रशासन वैकल्पिक कानूनी रास्तों के जरिए नए व्यापार शुल्क लागू करने की संभावनाओं पर विचार कर सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला आगामी अमेरिकी चुनावी माहौल में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि ट्रंप लंबे समय से अपनी सख्त व्यापार नीतियों को चुनावी एजेंडे का अहम हिस्सा बताते रहे हैं
read also: स्पाइस रेल यात्रा से बदलेगी व्यापार की तस्वीर! पश्चिम रेलवे ने असम तक भेजी ऐतिहासिक मसाला खेप











