15 मई 2026 से पेट्रोल डीजल के दाम में तीन-तीन रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू हो गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर मध्यप्रदेश के आम नागरिकों पर पड़ेगा। भोपाल और इंदौर — दोनों ही शहरों में पेट्रोल की कीमत 109 रुपए प्रति लीटर के पार निकल गई है। पहले से ही महंगे ईंधन दरों वाले इस राज्य में यह बढ़ोतरी और भारी साबित होगी।
भोपाल में अब कितना मिलेगा पेट्रोल-डीजल?
राजधानी भोपाल में बढ़ोतरी से पहले पेट्रोल 106.68 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। नई दरें लागू होने के बाद अब यह 109.08 रुपए प्रति लीटर हो गया है। वहीं डीजल की बात करें तो पहले यह 91.87 रुपए पर था, जो अब बढ़कर 94.98 रुपए प्रति लीटर हो गया है। कुछ इलाकों में दो-चार पैसों का मामूली अंतर भी देखने को मिल सकता है। पेट्रोल डीजल के दाम में यह उछाल आम लोगों के रोजमर्रा के बजट को प्रभावित करेगा।
इंदौर में भी बड़ा झटका, जानें नई कीमतें
व्यावसायिक राजधानी इंदौर में भी राहत नहीं मिली। वहाँ पेट्रोल की पुरानी कीमत 106.58 रुपए प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर 109.58 रुपए प्रति लीटर हो गई है। इसी तरह डीजल 91.97 रुपए से बढ़कर 94.97 रुपए प्रति लीटर पर पहुँच गया है। इंदौर में वाहन चालकों और कारोबारियों को इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ेगा, क्योंकि यह शहर परिवहन और व्यापार का बड़ा केंद्र है।
क्यों बढ़ाई गई कीमतें?
तेल कंपनियों को वैश्विक संकट के कारण लगातार नुकसान हो रहा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इस घाटे की भरपाई के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने का फैसला लिया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से अपील की है कि वे ईंधन का उपयोग कम करें और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें।
आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?
ईंधन की बढ़ी हुई कीमतें केवल गाड़ी चलाने तक सीमित नहीं रहतीं। परिवहन महंगा होने से सब्जियाँ, किराना और अन्य जरूरी सामानों की ढुलाई लागत भी बढ़ेगी। इसका असर सीधे बाजार में महँगाई के रूप में दिखेगा। मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों के लिए यह बोझ और भारी होगा।
निष्कर्ष
15 मई से लागू हुई बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल डीजल के दाम मध्यप्रदेश में नए उच्च स्तर पर पहुँच गए हैं। भोपाल और इंदौर दोनों शहरों में आम नागरिकों को अब ईंधन के लिए अधिक खर्च करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक राहत मिलना मुश्किल है।
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