दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में शामिल चीन में अब चीन की EV मंदी को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग कमजोर होती है तो इसका असर पूरी वैश्विक ऑटो इंडस्ट्री पर पड़ सकता है।
कमजोर बिक्री, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सरकारी सब्सिडी में कमी के कारण कई कंपनियों पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
चीन की EV मंदी से उद्योग में बढ़ी चिंता
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन में इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री की रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी पड़ी है।
सरकारी टैक्स छूट और सब्सिडी खत्म होने के बाद कई कंपनियों को बिक्री में गिरावट का सामना करना पड़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू बाजार में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और कीमतों की लड़ाई ने भी कंपनियों के मुनाफे पर असर डाला है।
वैश्विक ऑटो बाजार पर पड़ सकता है असर
चीन दुनिया में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन और निर्यात करने वाले देशों में शामिल है।
ऐसे में वहां की धीमी मांग का असर यूरोप, एशिया और अन्य बड़े बाजारों तक पहुंच सकता है।
कई चीनी कंपनियां अब विदेशी बाजारों पर ज्यादा फोकस कर रही हैं ताकि घरेलू दबाव को कम किया जा सके।
कंपनियां बदल रही रणनीति
बदलते बाजार हालात के बीच कई ऑटो कंपनियां अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं।
कुछ कंपनियां पूरी तरह इलेक्ट्रिक लाइनअप की बजाय हाइब्रिड वाहनों पर ध्यान बढ़ा रही हैं।
हाल ही में कुछ बड़े ब्रांड्स ने EV विस्तार योजनाओं को धीमा करने और नए हाइब्रिड मॉडल लॉन्च करने के संकेत दिए हैं।
निवेश और रोजगार पर भी दिख सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर EV बाजार में सुस्ती लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर निवेश, उत्पादन और रोजगार पर भी पड़ सकता है।
ऑटो कंपनियों को लागत कम करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए नए कदम उठाने पड़ सकते हैं।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती तेल कीमतें भविष्य में फिर से EV मांग को गति दे सकती हैं।
दुनिया भर की कंपनियों की नजर चीन पर
वैश्विक ऑटो कंपनियां चीन के बाजार को लेकर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में चीन की EV मांग और निर्यात के आंकड़े पूरी इंडस्ट्री की दिशा तय कर सकते हैं।
अगर बाजार में सुधार नहीं हुआ तो यह वैश्विक ऑटो सेक्टर के लिए बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकता है।










