ट्विशा शर्मा केस में अब जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली की चार सदस्यीय मेडिकल टीम भोपाल पहुंच गई है। यह टीम ट्विशा शर्मा का दूसरा पोस्टमार्टम करेगी। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।
AIIMS की टीम आधुनिक मेडिकल उपकरणों के साथ भोपाल पहुंची और रविवार को दूसरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया की तैयारी शुरू की गई। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर सकती है।
ट्विशा शर्मा केस में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की बड़ी कार्रवाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए AIIMS टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने मेडिकल बोर्ड गठित किया और AIIMS दिल्ली से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को भोपाल भेजा गया।
सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले को “संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत अनियमितताओं” से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। इससे जांच प्रक्रिया पर देशभर की नजरें टिक गई हैं।
पति समार्थ सिंह पुलिस रिमांड पर
भोपाल की अदालत ने ट्विशा शर्मा के पति और मुख्य आरोपी समार्थ सिंह को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अब 29 मई तक उससे पूछताछ करेगी। आरोपी के वकील ने रिमांड का विरोध किया, लेकिन अदालत ने जांच को देखते हुए पुलिस को अनुमति दे दी।
समार्थ सिंह को 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार किया गया था। वह कई दिनों तक फरार चल रहा था। मामले में उसकी मां और पूर्व जज गिरीबाला सिंह को भी नोटिस जारी किए गए हैं।
परिवार ने लगाए मानसिक प्रताड़ना और दहेज उत्पीड़न के आरोप
ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं और दिसंबर 2025 में उनकी शादी भोपाल निवासी समार्थ सिंह से हुई थी। 12 मई को उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
मृतका के परिवार ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को मानसिक प्रताड़ना और दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था। परिवार लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रहा है ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
CBI जांच की सिफारिश
मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच की सिफारिश भी कर दी है। परिवार का कहना है कि उन्हें स्थानीय जांच पर भरोसा नहीं है और सच सामने लाने के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना जरूरी है।
इस मामले ने देशभर में महिलाओं की सुरक्षा, दहेज प्रताड़ना और न्याय व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।











