क्वाड शिखर सम्मेलन को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। भारत इस साल प्रस्तावित क्वाड नेताओं की बैठक की मेजबानी नहीं करेगा और अब यह जिम्मेदारी ऑस्ट्रेलिया को सौंपे जाने की संभावना है। चार देशों के नेताओं के व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रम और वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह फैसला लिया गया है।
क्यों बदली क्वाड बैठक की योजना?
सरकारी और कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष नेताओं के कार्यक्रमों का तालमेल बैठाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। इसी वजह से अब हर साल भौतिक रूप से क्वाड नेताओं की बैठक आयोजित करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
भारत ने 2024 में क्वाड की अध्यक्षता संभाली थी और उम्मीद थी कि नई दिल्ली में बड़े स्तर पर शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही इसकी घोषणा कर दी थी, लेकिन बाद में कई अंतरराष्ट्रीय कारणों से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
रिपब्लिक डे योजना क्यों हुई रद्द?
जानकारी के अनुसार जनवरी 2024 में गणतंत्र दिवस के आसपास क्वाड नेताओं की बैठक आयोजित करने की तैयारी थी। उस समय अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के शामिल होने की संभावना जताई गई थी।
हालांकि ऑस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय दिवस भी 26 जनवरी को होने के कारण कार्यक्रमों का समन्वय कठिन हो गया। बाद में जो बाइडेन द्वारा गणतंत्र दिवस निमंत्रण स्वीकार नहीं करने के बाद पूरी योजना स्थगित करनी पड़ी।
क्वाड शिखर सम्मेलन पर अमेरिका का असर
इसके बाद अमेरिका ने सितंबर 2024 में अपने शहर विलमिंगटन में क्वाड बैठक आयोजित करने की पहल की। इसी कारण भारत के पास अध्यक्षता होने के बावजूद सम्मेलन अमेरिका में आयोजित किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक हालात और नेताओं की घरेलू राजनीतिक व्यस्तताओं ने क्वाड की नियमित वार्षिक बैठकों को प्रभावित किया है।
इंडो-पैसिफिक रणनीति में बढ़ी अहमियत
2017 में दोबारा सक्रिय हुए क्वाड समूह ने हमेशा खुद को सैन्य गठबंधन नहीं बताया है। फिर भी चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में इसकी रणनीतिक भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में क्वाड देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग को और अधिक विस्तार दिया जा सकता है।
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