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भोपाल जल संकट गहराया, तीन दिन से सूखे नल, लाखों लोग परेशान, टैंकरों के सहारे चल रही जिंदगी

भोपाल जल संकट गहराया, तीन दिन से सूखे नल, लाखों लोग परेशान, टैंकरों के सहारे चल रही जिंदगी
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भोपाल जल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। शहर की प्रमुख कोलार पाइपलाइन की मरम्मत निर्धारित समय से अधिक लंबी खिंचने के कारण लाखों नागरिकों को पानी की भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुरुआत में 36 घंटे की जलापूर्ति बंद रहने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब यह समस्या तीन दिन तक पहुंच गई है, जिससे कई इलाकों में लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है।

भोपाल जल संकट के पीछे क्या है वजह

मंगलवार सुबह नगर निगम ने कोलार ग्रेविटी मेन पाइपलाइन को आपातकालीन मरम्मत के लिए बंद किया था। यह पाइपलाइन शहर की पेयजल व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है और भोपाल की कुल दैनिक जल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा पूरा करती है। मरम्मत कार्य अपेक्षा से अधिक जटिल होने के कारण जलापूर्ति बहाल होने में लगातार देरी हो रही है।

कई इलाकों में बढ़ी परेशानी

जल आपूर्ति बंद होने का असर शहर के पुराने और नए दोनों हिस्सों में देखने को मिला है। शाहजहांनाबाद, निशातपुरा, हमीदिया रोड, शाहपुरा, त्रिलंगा, अरेरा कॉलोनी, तुलसी नगर, शिवाजी नगर, एमपी नगर और गुलमोहर कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों में लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर पानी का दबाव कम होने और रिसाव की शिकायतें भी सामने आई हैं।

टैंकरों के भरोसे चल रही व्यवस्था

नगर निगम ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए पानी के टैंकर भेजने का दावा किया है। हालांकि, कई परिवारों का कहना है कि मांग के मुकाबले आपूर्ति पर्याप्त नहीं है। घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए लोगों को संग्रहित पानी का सीमित उपयोग करना पड़ रहा है, जबकि कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठान निजी टैंकरों का सहारा ले रहे हैं।

मरम्मत के बाद भी लगेगा समय

अधिकारियों के अनुसार पाइपलाइन की मरम्मत पूरी होने के बाद भी जलापूर्ति तुरंत सामान्य नहीं होगी। पानी को शोधन संयंत्रों तक पहुंचने और फिर विभिन्न इलाकों में वितरित होने में कई घंटे लगेंगे। ऐसे में शहरभर में नियमित जल वितरण बहाल होने में अतिरिक्त समय लग सकता है।

शहर की बढ़ती पानी की मांग

तेजी से बढ़ती आबादी के कारण भोपाल की दैनिक जल आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में शहर को नर्मदा परियोजना, कोलार बांध, बड़ा तालाब और केरवा बांध सहित विभिन्न स्रोतों से पानी उपलब्ध कराया जाता है। इन सभी स्रोतों से प्रतिदिन सैकड़ों मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है, लेकिन किसी एक प्रमुख लाइन में बाधा आने पर पूरे सिस्टम पर असर पड़ता है।

प्रशासन ने दिया भरोसा

नगर निगम का कहना है कि विशेषज्ञ टीमें चौबीसों घंटे मरम्मत कार्य में जुटी हुई हैं। अधिकारियों ने नागरिकों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि मरम्मत पूरी होते ही चरणबद्ध तरीके से जलापूर्ति सामान्य कर दी जाएगी। हालांकि, शहर के कई इलाकों में लोगों की नजरें अब पानी की नियमित आपूर्ति बहाल होने पर टिकी हैं।

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