श्रुतिका बरनवाल की कहानी उन हजारों युवाओं की तरह थी जो बेहतर भविष्य और नए सपनों के साथ अपने करियर की शुरुआत करते हैं। लेकिन दिल्ली में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने उनके जीवन की यात्रा को अचानक समाप्त कर दिया। नई नौकरी जॉइन करने के लिए राजधानी पहुंचीं श्रुतिका बरनवाल अब अपने परिवार, दोस्तों और शिक्षकों की यादों में ही जीवित रहेंगी।
श्रुतिका बरनवाल को था नई शुरुआत का इंतजार
26 वर्षीय श्रुतिका बरनवाल हाल ही में एक नई नौकरी के लिए दिल्ली पहुंची थीं। वह अपने करियर के नए अध्याय को लेकर बेहद उत्साहित थीं और दोस्तों से लगातार संपर्क में थीं। बताया जाता है कि हादसे वाले दिन सुबह भी उन्होंने अपने मित्र से बात की थी और अपनी नई जिम्मेदारियों को लेकर खुशी जाहिर की थी।
लेकिन कुछ ही देर बाद अचानक आग लगने की घटना ने सब कुछ बदल दिया। उनके मित्रों के अनुसार आखिरी बातचीत के दौरान उन्होंने मदद के लिए आवाज लगाई थी, जिसके बाद संपर्क टूट गया।
होटल में लगी आग बनी मौत का कारण
दिल्ली के हौज रानी इलाके स्थित एक गेस्ट हाउस में लगी भीषण आग ने कई लोगों की जान ले ली। इसी हादसे में श्रुतिका बरनवाल भी अपनी जान गंवा बैठीं।
घटना के बाद उनके दोस्तों और परिचितों ने विभिन्न अस्पतालों में उनकी तलाश शुरू की। कई घंटों की कोशिशों के बाद उनके निधन की पुष्टि हुई, जिससे परिवार और करीबी लोगों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
शिक्षा और सामाजिक कार्यों से जुड़ी थीं श्रुतिका
झारखंड की रहने वाली श्रुतिका ने अपनी पढ़ाई के दौरान भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने जीव विज्ञान में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और बाद में जल नीति एवं प्रशासन से जुड़ी उच्च शिक्षा हासिल की।
पढ़ाई के दौरान वह सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर भी सक्रिय रूप से काम करती रहीं। उनके शिक्षक बताते हैं कि वह हमेशा नई चीजें सीखने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उत्साहित रहती थीं।
सहकर्मियों और शिक्षकों ने किया याद
श्रुतिका के शिक्षकों और सहकर्मियों ने उन्हें एक ऊर्जावान, मेहनती और सकारात्मक सोच रखने वाली युवती बताया। उनके अनुसार वह अपने काम को लेकर बेहद गंभीर थीं और लोगों के साथ बेहतर संबंध बनाने की क्षमता रखती थीं।
नई नौकरी मिलने के बाद वह भविष्य को लेकर काफी आशावादी थीं और अपने पेशेवर जीवन में आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार थीं।
परिवार और दोस्तों में शोक की लहर
हादसे की खबर मिलते ही परिवार और मित्रों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। जिन लोगों ने उनके साथ पढ़ाई की थी या काम किया था, वे इस दुखद घटना से स्तब्ध हैं।
परिजन अब भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि परिवार की होनहार बेटी, जो अपने सपनों को पूरा करने निकली थी, इतनी जल्दी उन्हें छोड़कर चली जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर भवनों में सुरक्षा मानकों और अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन होना जरूरी है।
श्रुतिका बरनवाल की असमय मौत केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि उन सपनों का अंत भी है जिन्हें उन्होंने मेहनत और उम्मीदों के साथ संजोया था।
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