स्वास्थ्य मंदिर प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में मनाया स्वतंत्रता दिवस,

  • RSS के अभा कार्यकारिणी सदस्य वैद्य ने किया ध्वजारोहण

आगर। सेवा भारती द्वारा संचालित भाग्यवंती देवी सरदारमल भंडारी स्वास्थ्य मंदिर प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग केंद्र आगर में आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीमान मनमोहन जी वैद्य का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

अपने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वास्थ्य मंदिर से संबंधित सभी साधक गण एवं कार्यकर्ता बंधु आपको स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। स्वतंत्र भारत में जन्म लेना यह भाग्य का विषय है और हम सब भाग्यशाली हैं।

लेकिनअनेक लोगों ने वर्षों तक संघर्ष किया, युद्ध किया व समाज को जगाया है। ऐसा स्वाधीनता के लिए प्रयास 150 वर्षों तक चला तब कहीं हम स्वाधीन हुए। डेढ़ सौ वर्षो में एक जनरेशन बदल जाती है अनेकों को यह विश्वास नहीं था कि उनके जीवन में वह आजादी देख पाएंगे फिर भी उन्होंने किया जेल में गए फांसी पर लटके सत्याग्रह किया। क्योंकि आने वाली पीढ़ी स्वाधीन भारत में जन्म ले सके। इसका लाभ हमें मिला है हम सब स्वाधीन भारत में जन्म लिए हुए हैं हम सब पर स्वतंत्र होने के साथ-साथ जिम्मेदारी व दायित्व भी आता है है।

अभी मुझे मार्गदर्शन हेतु कहा गया यह बड़ा आसान शब्द है। मार्ग सबको पता होता है महत्व का क्या है दो लड़कियां मंदिर दर्शन हेतु रास्ते में जा रही थी रास्ते में चलते-चलते दो रास्ते निकलते हैं लड़कियों को पता नहीं है कि मंदिर कौन सा रास्ता जा रहा है तभी वहां पर एक बुढी मां दिखाई देती है। लड़कियों ने मां से पूछा दादी मां यह रास्ता कहां जाता है। दादी मां ने कहा बेटा रास्ता कहीं पर भी नहीं जाता है यहीं पर रहता है। तुम इस पर चलोगे तो कहां पर पहुंचोगे यह मैं कह सकती हूं। इसका मतलब क्या हुआ मार्गदर्शन तो हो जाता है पर चलना महत्व का है।

हमें इस भारत को गढ़ना है और भारत को बनाना है । छोटी-मोटी बातें हैं हम स्वतंत्र हैं इसका मतलब यह नहीं कि मैं सिर्फ मेरा विचार करूंगा । मैं हूं क्योंकि हम हैं हम सब हम की चिंता करेंगे तो मैं की चिंता अपने आप समाज कर लेगा । यही संगठन का भाव है।

पहले लोग बैलगाड़ी आदि पर चलते थे वाहन स्पीड से नहीं चलते थे तो ट्रैफिक के नियम आदि नहीं थे । अब हर एक के पास गाड़ी आ गई है गाड़ी स्पीड से चलती है। तो पहले पुलिस खड़े होते थे बाद में ट्रैफिक सिग्नल आ गए जिसमें लाल हरा आदि सिग्नल होते हैं। लोगों को पता है कि सिग्नल लाल होने पर रुकना है हरा होने पर चलना है। पता सबको है करते कोई नहीं। यानी मुझे ट्रैफिक के नियम पालन करने हेतु पुलिस का खड़ा होना आवश्यक है। यानी मुझे मनुष्य होने का अर्थ पता नहीं है क्या मार्ग पता है पर चलते नहीं है। एक माजी स्कूटी पर जा रही थी उन्होंने सिग्नल पर लाल लाइट होने पर भी गाड़ी नहीं रोकी और आगे निकल गई तभी वहां पर एक पुलिस वाले ने उसे रोका और चालान बनाते हुए पूछा कि माजी आपको लाल लाइट दिखाई नहीं दी थी क्या । मां जी ने कहा लाल लाइट देखी थी आपको नहीं देखा। यानी पुलिस होने पर नियम पालन करेंगे पुलिस नहीं होने पर नियम पालन नहीं करेंगे यह कहां का मनुष्यत्व है। हमारे जो नागरिक कर्तव्य है वह बिल्कुल सामान्य है बहुत इमरजेंसी है भागना पड़ा वहां पर नियम तोड़ते हैं बात समझ में आती है पर्याप्त समय लेकर चले तो फिर इसमें से देश बनता है। कचरा कहां डालना इसकी जगह कहां पर है टैक्स भरना तो पूरा भरना। अमेरिका में सरकारी गाड़ी एवं पुलिस की गाड़ी भी टोल टैक्स देती है। हमारे यहां हर व्यक्ति जुगाड़ जमाने का प्रयत्न करता है। यदि रास्ते का लाभ ले रहे हैं तो टाल देना चाहिए। नियमों का पालन करना चाहिए यह मेरे देश के नियम है। मेरे देश के नियमों का पालन करके मुझे मेरे देश को बनाना है। कचरा कूड़ेदान में ही डालें इसकी आदत डालना यह मेरे देश बनाने का ही भाग है। परीक्षा में नकल नहीं करना मुझे मेरी पढ़ाई के आधार पर ही परीक्षा देना मैं कॉपी नहीं करूं इसके लिए शिक्षक का उपस्थित होना यह मेरे मनुष्य होने का अपमान है।

 

समाज को बनाना भी है समाज को गढ़ना भी है । हमारे यहां अनेक प्रकार की भाषाएं बोली जाती है , अनेक प्रकार के खानपान की पद्धती है। हम सब भारत मां की संतान है यह भारतीयता का बोध सब में होना चाहिए। तो फिर यह सारी क्षेत्र की भाषा की खान-पान की विविधता हम सब की विशेषता बन जाती है। लोग हमको आपस में लड़ाने के लिए तैयार बैठे हैं । नॉर्थ साउथ का झगड़ा हो हिंदी नॉन हिंदी का झगड़ा हो ग्रामीण शहरी का झगड़ा हो। हमें उनके चक्कर में नहीं फसना है। हम सब एक हैं।

हमारे यहां अनेक जातियां है।एक है जाति व्यवस्था और दूसरी है जाति भेद। हमारे यहां घर चलाने के लिए पैसे कमाने के लिए कौन सा कार्य करना यह जानी तय करती थी। भारतीय संविधान में यह समाप्त किया है भारत में जाति व्यवस्था नहीं है अपनी क्षमता के आधार पर किसी भी जाति का व्यक्ति हो वह अध्यापक बन सकता है वकील बन सकता है व्यापार कर सकता है। यहां पर किसी का कुर्ता पीला है किसी का लाल है किसी का सफेद है यह वर्ण हुआ इसमें कोई बुराई नहीं है। जाति भेद गलत है। यह ऊंचा यह निचा यह नीचे बैठेगा या ऊपर बैठेगा यह बिल्कुल गलत है।

 

हमें जो यह स्वातन्त्र मिला है इस स्वतंत्रता का उपयोग नागरिक कर्तव्य सामाजिक समरसता पर्यावरण संरक्षण व सारा समाज एक है यह भाव जगाना है और मुझे समाज को लौटना है वह मेरा कार्य मुझे ईमानदारी से करना है। ऐसी छोटी-छोटी बातों से देश को गढ़ना है मार्ग सबको पता है महत्व चलने का है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष श्रीमान मोहन जी आर्य ने की एवं आभार प्रदर्शन संस्था के सचिव श्रीमान जगदीश जी सोनी ने किया।

 

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