आमलकी एकादशी 2025: तिथि, महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त जानें

आमलकी एकादशी 2025: तिथि, महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त जानें

Amalaki Ekadashi 2025 Date | आमलकी एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस बार यह पर्व 10 मार्च 2024, रविवार को पड़ रहा है। यह एकादशी होली से 4 दिन पहले आती है और इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से रंग खेलने की परंपरा शुरू हो जाती है। काशी विश्वनाथ मंदिर में इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष श्रृंगार किया जाता है और डोला निकाला जाता है। आइए जानते हैं आमलकी एकादशी की तिथि, महत्व, मान्यताएं और पूजा विधि के बारे में विस्तार से। Amalaki Ekadashi 2025 Date

आमलकी एकादशी 2024 की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 9 मार्च 2024, शनिवार सुबह 7 बजकर 45 मिनट से
  • एकादशी तिथि समाप्त: 10 मार्च 2024, रविवार सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक
  • व्रत तिथि: 10 मार्च 2024, रविवार
  • पारण समय (व्रत तोड़ने का समय): 11 मार्च, सोमवार सुबह 6 बजकर 36 मिनट से 8 बजकर 51 मिनट तक

उदया तिथि के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत 10 मार्च को रखा जाएगा।

आमलकी एकादशी का महत्व

आमलकी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है और इसका सेवन किया जाता है। मान्यता है कि आंवले के वृक्ष की पूजा करने और उसका सेवन करने से अच्छा स्वास्थ्य और सौभाग्य प्राप्त होता है।

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत करने से सैकड़ों तीर्थयात्राओं और यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत करियर और व्यवसाय में सफलता दिलाने में भी सहायक माना जाता है।

आमलकी एकादशी को क्यों कहते हैं रंगभरी एकादशी?

आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से रंग खेलने की परंपरा शुरू हो जाती है। काशी में इस पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती विवाह के बाद पहली बार काशी आए थे। इसलिए, इस दिन भक्त शिव जी पर रंग, अबीर और गुलाल चढ़ाकर उनकी आराधना करते हैं।

काशी में रंगभरी एकादशी के बाद छह दिनों तक रंग खेलने की परंपरा है। मान्यता है कि शिव जी पर गुलाल चढ़ाने से जीवन सुखमय होता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह त्योहार शिव और पार्वती के काशी आगमन का प्रतीक है और काशी की संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है।

आमलकी एकादशी की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें: इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु की पूजा: घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। उन्हें तुलसी दल, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
  • आंवले के पेड़ की पूजा: आंवले के पेड़ की पूजा करें। पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और उसे जल, फूल और अक्षत अर्पित करें।
  • भजन-कीर्तन और व्रत कथा: इस दिन भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें और आमलकी एकादशी की व्रत कथा सुनें।
  • रात्रि जागरण: रात में भगवान विष्णु के सामने नौ बत्तियों वाला दीपक जलाकर रखें और रात भर जागरण करें।
  • दान-पुण्य: इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और दान देना शुभ माना जाता है।

आमलकी एकादशी की मान्यताएं

  • इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने और उसका सेवन करने से अच्छा स्वास्थ्य और सौभाग्य प्राप्त होता है।
  • मान्यता है कि इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
  • काशी में रंगभरी एकादशी के दिन शिव जी पर गुलाल चढ़ाने से जीवन सुखमय होता है।

आमलकी एकादशी एक पवित्र और शुभ पर्व है, जो भगवान विष्णु और शिव की कृपा प्राप्त करने का अद्भुत अवसर प्रदान करता है। इस दिन व्रत रखकर, पूजा-अर्चना करके और दान-पुण्य करके व्यक्ति अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकता है। साथ ही, रंगभरी एकादशी के रूप में यह पर्व काशी की संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखता है। Amalaki Ekadashi 2025 Date


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