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कोल्ड ड्रिंक और च्विंगम बन सकते हैं माइग्रेन का कारण, आर्टिफिशियल स्वीटनर से ब्लड शुगर भी हो सकता है गड़बड़

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कोल्ड ड्रिंक और च्विंगम बन सकते हैं माइग्रेन का कारण, आर्टिफिशियल स्वीटनर से ब्लड शुगर भी हो सकता है गड़बड़

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स में मौजूद एस्पार्टेम और सुक्रालोज संवेदनशील लोगों में सिरदर्द, एंग्जायटी और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ा सकते हैं

Artificial Sweeteners Side Effects | आजकल वजन घटाने और कैलोरी कम करने के नाम पर डाइट कोल्ड ड्रिंक, शुगर-फ्री च्विंगम और मिठाइयों का चलन तेजी से बढ़ा है। हालांकि, न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स और हालिया रिसर्च यह संकेत दे रही हैं कि इन उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले आर्टिफिशियल स्वीटनर सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।

डाइट सोडा, पैकेज्ड फूड और शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स में आमतौर पर एस्पार्टेम और सुक्रालोज जैसे आर्टिफिशियल स्वीटनर का उपयोग किया जाता है। ये कैलोरी तो कम करते हैं, लेकिन कई लोगों में इनके सेवन के बाद सिरदर्द या माइग्रेन की शिकायत देखी गई है।

न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार, आर्टिफिशियल स्वीटनर संवेदनशील लोगों में न्यूरोलॉजिकल ट्रिगर की तरह काम कर सकते हैं। खासतौर पर एस्पार्टेम दिमाग में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे न्यूरोकेमिकल्स को प्रभावित करता है, जिससे सिरदर्द की तीव्रता बढ़ सकती है।

रिसर्च बताती है कि जो लोग पहले से माइग्रेन, एंग्जायटी, हार्मोनल असंतुलन या नींद की कमी से जूझ रहे हैं, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। ऐसे लोगों को आर्टिफिशियल स्वीटनर लेने के कुछ समय बाद ही सिरदर्द या बेचैनी महसूस हो सकती है।


ब्लड शुगर पर भी पड़ता है असर

भले ही डाइट कोल्ड ड्रिंक में चीनी नहीं होती, लेकिन इसका मीठा स्वाद दिमाग को भ्रमित कर देता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे शरीर की मेटाबॉलिक प्रतिक्रिया प्रभावित होती है और इंसुलिन संतुलन बिगड़ सकता है। इसका नतीजा ब्लड शुगर लेवल के उतार-चढ़ाव के रूप में सामने आ सकता है, जो प्रीडायबिटीज या डायबिटीज की ओर बढ़ने का संकेत भी हो सकता है।


गट हेल्थ बिगड़ने से बढ़ती हैं समस्याएं

आर्टिफिशियल स्वीटनर आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे गैस, एसिडिटी, अपच जैसी दिक्कतें बढ़ती हैं, जिसका असर मूड और सिरदर्द पर भी पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि खराब गट हेल्थ माइग्रेन को और गंभीर बना सकती है।


एक्सपर्ट की सलाह

विशेषज्ञों के अनुसार, माइग्रेन का पुराना इतिहास, क्रॉनिक स्ट्रेस, खराब स्लीप साइकिल, कैफीन या प्रोसेस्ड फूड के प्रति संवेदनशीलता और प्रीडायबिटीज वाले लोग ज्यादा जोखिम में रहते हैं। ऐसे लोगों को शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स का सेवन सीमित करने की सलाह दी जाती है।


इन लोगों को रहना चाहिए ज्यादा सावधान

  • माइग्रेन या बार-बार सिरदर्द की समस्या
  • एंग्जायटी या क्रॉनिक स्ट्रेस
  • नींद की कमी
  • प्रीडायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या
  • कैफीन और प्रोसेस्ड फूड से संवेदनशीलता

राहत के लिए क्या करें

  • आर्टिफिशियल स्वीटनर का सेवन कम करें
  • संतुलित और प्राकृतिक आहार लें
  • पर्याप्त नींद और पानी पिएं
  • डॉक्टर की सलाह से मैग्नीशियम और विटामिन B12 लें

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