भारतीय रेलवे 100% विद्युतीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रेलवे 100% विद्युतीकरण के लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुका है और अब तक लगभग 99.4 प्रतिशत रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह पहल भारत की ऊर्जा निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
भारतीय रेलवे पहले बड़े पैमाने पर डीजल इंजन पर निर्भर था, लेकिन अब तेजी से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर बढ़ रहा है।
भारतीय रेलवे 100% विद्युतीकरण से घटेगी तेल पर निर्भरता
भारतीय रेलवे 100% विद्युतीकरण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में किसी भी बाधा का सीधा असर देश की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
रेलवे विद्युतीकरण के कारण डीजल खपत में बड़ी कमी आई है। वित्त वर्ष 2024–25 में भारतीय रेलवे ने करीब 178 करोड़ लीटर डीजल की खपत कम की, जो वर्ष 2016–17 की तुलना में लगभग 62 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
तेजी से पूरा हुआ रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण
भारतीय रेलवे 100% विद्युतीकरण की दिशा में पिछले दशक में अभूतपूर्व गति से काम हुआ है। देश के 70,001 किलोमीटर ब्रॉड गेज रेलवे नेटवर्क में से लगभग 69,427 किलोमीटर मार्ग पहले ही विद्युतीकृत किए जा चुके हैं।
अब केवल कुछ हिस्से ही शेष हैं जो पांच राज्यों में स्थित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार रेलवे के इतिहास में यह सबसे तेज बुनियादी ढांचा परिवर्तन माना जा रहा है।
दुनिया के लिए बना उदाहरण
भारतीय रेलवे 100% विद्युतीकरण की पहल वैश्विक स्तर पर भी एक उदाहरण बन रही है। दुनिया के बहुत कम देशों के पास पूरी तरह विद्युतीकृत रेलवे नेटवर्क है।
भारतीय रेलवे का नेटवर्क स्विट्जरलैंड जैसे पूरी तरह विद्युतीकृत देश के रेलवे नेटवर्क से लगभग 13 गुना बड़ा है, जो इस उपलब्धि को और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
भारतीय रेलवे 100% विद्युतीकरण से संचालन लागत में भी बड़ी कमी आएगी। इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन डीजल इंजन की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत तक सस्ता माना जाता है।
इससे रेलवे को वैश्विक ईंधन कीमतों के उतार-चढ़ाव से भी राहत मिलेगी और यात्रियों के लिए किराया भी किफायती बना रहेगा।
इसके साथ ही रेलवे में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2014 में रेलवे की सोलर क्षमता केवल 3.68 मेगावाट थी, जो नवंबर 2025 तक बढ़कर लगभग 898 मेगावाट हो चुकी है।
2030 तक नेट-जीरो लक्ष्य
भारतीय रेलवे 100% विद्युतीकरण के साथ-साथ 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य भी हासिल करना चाहता है। इसके लिए रेलवे नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और हरित तकनीकों पर लगातार निवेश कर रहा है।
रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार आने वाले वर्षों में रेलवे की ऊर्जा मांग 10 गीगावाट से अधिक हो सकती है, जिसका अधिकांश हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने की योजना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे का यह परिवर्तन भारत की हरित अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
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