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भोपाल मेट्रो जवाहर चौक संकट से उजड़े 900 व्यापारी, टूटती दुकानों ने बढ़ाई चिंता

भोपाल मेट्रो जवाहर चौक संकट से उजड़े 900 व्यापारी, टूटती दुकानों ने बढ़ाई चिंता
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राजधानी में तेजी से चल रहे मेट्रो निर्माण के बीच भोपाल मेट्रो जवाहर चौक संकट अब बड़ा मुद्दा बन गया है। शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाके जवाहर चौक में मेट्रो निर्माण के कारण कई दुकानों में दरारें आ गई हैं और कुछ हिस्सों के गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इस स्थिति से करीब 900 व्यापारियों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भोपाल मेट्रो जवाहर चौक संकट के चलते व्यापारी कई वर्षों से पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

व्यापारियों का आरोप है कि मेट्रो परियोजना के कारण उनकी दुकानों को नुकसान पहुंचा है, जबकि उन्हें अब तक उचित पुनर्वास और आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी है।

भोपाल मेट्रो जवाहर चौक संकट: निर्माण कार्य से बढ़ा खतरा

भोपाल मेट्रो जवाहर चौक संकट का मुख्य कारण ब्लू लाइन कॉरिडोर का निर्माण कार्य बताया जा रहा है। इस कॉरिडोर के तहत जवाहर चौक, रोशनपुरा, कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, लाल परेड ग्राउंड और पुल बोगदा जैसे इलाकों में भारी मशीनों से खुदाई और पाइलिंग का काम चल रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार लगातार हो रहे भारी निर्माण कार्य से जमीन में कंपन पैदा होता है, जिससे आसपास की पुरानी इमारतों और दुकानों की संरचना कमजोर पड़ सकती है। जवाहर चौक में कई दुकानें दशकों पुरानी हैं और इस तरह के कंपन को सहने के लिए डिजाइन नहीं की गई थीं।

इसके कारण कई दुकानों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं और कुछ हिस्से गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

वर्षों से चल रहा है पुनर्वास का विवाद

भोपाल मेट्रो जवाहर चौक संकट अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि यह कई वर्षों से चल रही समस्याओं का परिणाम है। व्यापारियों के अनुसार मेट्रो और स्मार्ट सिटी परियोजना के कारण करीब 900 दुकानों को हटाया गया था।

व्यापारियों का दावा है कि अधिकारियों ने उन्हें कटजू अस्पताल के पास स्थित प्लॉट नंबर 47-49 में नई दुकानें देने का आश्वासन दिया था। हालांकि बाद में उन्हें वहां दुकानें देने के बजाय वैकल्पिक बाजार में जाने के लिए कहा गया।

व्यापारियों का कहना है कि उन्हें केवल लगभग 25 हजार रुपये की राशि दी गई, जो किसी भी व्यापारी के लिए बेहद कम है।

पहले भी विस्थापन का सामना कर चुके हैं व्यापारी

भोपाल मेट्रो जवाहर चौक संकट के पहले भी कई व्यापारी विस्थापन का सामना कर चुके हैं। लगभग चार साल पहले जवाहर चौक के करीब 150 व्यापारियों को टीटी नगर स्टेडियम के पास दुकानें आवंटित की गई थीं।

लेकिन व्यापारियों के अनुसार नई जगह का किराया और खर्च इतना अधिक था कि अधिकतर लोगों को अपनी दुकानें बेचनी पड़ीं। इसके बाद कई व्यापारी फुटपाथ पर ठेला लगाकर अपना व्यवसाय चलाने को मजबूर हो गए।

मेट्रो परियोजना में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़

भोपाल मेट्रो जवाहर चौक संकट के बीच मेट्रो परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण और तोड़फोड़ का काम चल रहा है। पुल बोगदा क्षेत्र में ब्लू और ऑरेंज लाइन के इंटरचेंज के लिए करीब 230 पुराने मकानों और दुकानों को हटाया जाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्माण कार्य को पूरा होने में लगभग दो साल का समय लग सकता है।

व्यापारियों की मांग: उचित मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास

भोपाल मेट्रो जवाहर चौक संकट के बीच व्यापारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें उचित मुआवजा और व्यवस्थित पुनर्वास दिया जाए। व्यापारियों का कहना है कि यदि उनकी दुकानों को हटाया जा रहा है तो उन्हें ऐसी जगह दुकानें दी जाएं जहां उनका व्यापार फिर से चल सके।

व्यापारी संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि कई बार अधिकारियों से मुलाकात और विरोध प्रदर्शन के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला है।

शहर के विकास और व्यापारियों के भविष्य के बीच संतुलन जरूरी

भोपाल मेट्रो जवाहर चौक संकट यह भी दिखाता है कि शहर के विकास और स्थानीय व्यापारियों के हितों के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है। मेट्रो परियोजना शहर के लिए महत्वपूर्ण है और इससे आने वाले समय में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी।

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े विकास कार्य में प्रभावित लोगों के पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था उतनी ही मजबूत होनी चाहिए, जितनी परियोजना की योजना।

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