‘भूल चूक माफ’ अगले हफ्ते ओटीटी पर आएगी यह पकाऊ फिल्म

‘भूल चूक माफ’ अगले हफ्ते ओटीटी पर आएगी यह पकाऊ फिल्म

पकाऊ और झिलाऊ के साथ जी मचलाऊ है फिल्म, अगले हफ्ते ओटीटी पर

Bhul chuk maaf | ‘भूल चूक माफ’ का ट्रेलर जितना रंगीन और आकर्षक लगता है, उतनी ही निराशाजनक यह फिल्म सिनेमाघरों में साबित हो रही है। यह फिल्म न केवल पकाऊ और झिलाऊ है, बल्कि कई बार तो जी मचलाऊ भी लगती है। निर्माता दिनेश विजन, जो कभी अपनी अनोखी कहानियों के लिए जाने जाते थे, इस बार अपने विजन में चूक गए हैं। अगर आप इस फिल्म को देखने की सोच रहे हैं, तो सलाह है कि इसे अगले हफ्ते ओटीटी पर देख लें, क्योंकि सिनेमाघर में यह आपके धैर्य की कठिन परीक्षा लेगी।

‘भूल चूक माफ’ की कहानी बनारस की रंगीन गलियों में सेट है, जहां एक युवा जोड़ा अपनी शादी की तैयारियों में व्यस्त है। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब हीरो का जीवन एक टाइम लूप में फंस जाता है। हर सुबह वह शादी के एक दिन पहले वाले दिन में जागता है, और बार-बार हल्दी की रस्म में मेरिनेट होता रहता है। यह कॉन्सेप्ट सुनने में रोमांचक लगता है, लेकिन स्क्रीन पर यह जल्दी ही दोहराव और उबाऊपन का शिकार हो जाता है।

क्या है खास?

  • बनारसी माहौल: फिल्म में बनारस की गंगा घाट, गलियां, और पान की दुकानों का चित्रण रंगीन है। बनारसी बामण जोड़ी की केमिस्ट्री शुरू में प्यारी लगती है, लेकिन जल्द ही यह दोहराव का शिकार हो जाती है।

  • टाइम लूप का कॉन्सेप्ट: यह विचार नया और रोचक हो सकता था, लेकिन इसका उपयोग कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय दर्शकों को थकाने में किया गया है।

कमजोरियां जो रास नहीं आतीं

  1. दोहराव और उबाऊपन: फिल्म की अवधि 121 मिनट है, लेकिन बार-बार दोहराए जाने वाले दृश्य दर्शकों को बोर करते हैं। कई बार तो लगता है कि स्क्रिप्ट राइटर ने कहानी को जानबूझकर खींचा है।

  2. भाषा और संवाद: फिल्म की पृष्ठभूमि भले ही बनारस की हो, लेकिन किरदार कभी अवधी, कभी बुंदेलखंडी, और कभी चलताऊ हिंदी बोलते हैं। कई संवाद व्हाट्सऐप फॉरवर्ड जैसे लगते हैं, जो गंभीरता को कम करते हैं।

  3. कॉमेडी का अभाव: यह एक कॉमेडी फिल्म होने का दावा करती है, लेकिन हास्य के नाम पर कुछ फीके जोक्स और जबरदस्ती ठूंसे गए गैग्स ही नजर आते हैं।

  4. संगीत और गाने: फिल्म के गाने कहानी में कोई योगदान नहीं देते। वे न तो याद रहते हैं और न ही माहौल को बढ़ाते हैं।

  5. उपदेशात्मक अंत: अंत में सामाजिक संदेश देने की कोशिश फिल्म को और बोझिल बनाती है।

अभिनय और निर्देशन

  • अभिनय: बनारसी जोड़े के किरदार निभाने वाले अभिनेताओं ने कोशिश तो की है, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और दोहराव भरे दृश्य उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। सहायक किरदारों की भीड़ कहानी को भटकाती है।

  • निर्देशन: निर्देशक ने टाइम लूप के कॉन्सेप्ट को सही तरीके से पेश करने में चूक की है। बनारस का माहौल तो दिखाया गया, लेकिन कहानी में गहराई और रोमांच का अभाव है।

दर्शकों के लिए सलाह

अगर आप बनारस की सैर करना चाहते हैं या टाइम लूप के कॉन्सेप्ट को देखने के मूड में हैं, तो भी यह फिल्म आपके लिए निराशाजनक हो सकती है। कॉमेडी की तलाश में सिनेमाघर जाने की बजाय, अगले हफ्ते ओटीटी पर इसका इंतजार करें। यह फिल्म उन दर्शकों के लिए हो सकती है, जो हल्की-फुल्की कहानी बिना ज्यादा उम्मीद के देखना चाहते हैं। Bhul chuk maaf

रेटिंग: 2/5

‘भूल चूक माफ’ एक ऐसी फिल्म है, जो अपने वादों को पूरा नहीं कर पाती। बनारसी माहौल और टाइम लूप का कॉन्सेप्ट शुरू में आकर्षित करता है, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट, फीके संवाद, और दोहराव इसे दर्शकों के लिए अझेलनीय बनाते हैं।

उपाय: अगर आप सिनेमाघर में समय और पैसे बचाना चाहते हैं, तो इस फिल्म को ओटीटी पर देखें, या फिर बनारस घूमने का प्लान बनाएं—वह ज्यादा मजेदार होगा! Bhul chuk maaf

भूल चूक माफ’ एक ऐसी फिल्म है, जो बनारस की रंगीन पृष्ठभूमि और टाइम लूप जैसे अनोखे कॉन्सेप्ट के बावजूद दर्शकों को बांधने में नाकाम रहती है। अगर आप कॉमेडी, रोमांच, या भावनात्मक गहराई की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है। अगले हफ्ते ओटीटी पर इसका इंतजार करें, क्योंकि सिनेमाघर में यह आपके धैर्य की कठिन परीक्षा लेगी। Bhul chuk maaf


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