सैलरी, ग्रेच्युटी और ओवरटाइम पर बड़ा एलान, जानें नए लेबर कोड के बड़े फायदे

सैलरी, ग्रेच्युटी और ओवरटाइम पर बड़ा एलान, जानें नए लेबर कोड के बड़े फायदे

Big benefits of the new labor code | नई दिल्ली, 22 नवंबर 2025: केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश के 29 पुराने श्रम कानूनों को रद्द कर चार नए लेबर कोड लागू कर दिए। ये कोड – वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता – आधुनिक अर्थव्यवस्था के अनुरूप हैं, जो गिग इकॉनमी, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और डिजिटल जॉब्स को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “आत्मनिर्भर भारत का मजबूत आधार” बताया, जबकि श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि इससे 40 करोड़ असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पहली बार सामाजिक सुरक्षा का जाल मिलेगा।

ये सुधार न केवल श्रमिकों की गरिमा और आय बढ़ाएंगे, बल्कि व्यवसायों के लिए अनुपालन को सरल बनाएंगे। उद्योग संगठनों जैसे FICCI और ISF ने इसे “सकारात्मक कदम” करार दिया, जो रोजगार सृजन को गति देगा। लेकिन, कुछ श्रम संगठनों ने विरोध जताया है, दावा करते हुए कि इससे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के अधिकार कमजोर हो सकते हैं। आइए, पहले एक नजर डालें लेबर कोड से श्रमिक अधिकारों में हुए बदलावों पर (नीचे टेबल में), फिर विस्तार से जानें 12 प्रमुख प्रावधान:

लेबर कोड से श्रमिक अधिकारों में बदलाव: एक तुलनात्मक नजर

श्रमिक अधिकार पहले की व्यवस्था नई व्यवस्था
सभी कर्मचारियों का रिकॉर्ड निवेशित प्रक्रिया अनिवार्य नहीं थी सभी कर्मचारियों का डिजिटल रिकॉर्ड अनिवार्य; लाइव सैलेरी, डिडक्शन और वर्किंग डेज़ की पारदर्शिता
सामाजिक सुरक्षा सीमित सामाजिक सुरक्षा कवरेज सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा; एग्रीगेटर्स (जैसे उबर) को 1-2% टर्नओवर से योगदान
न्यूनतम वेतन न्यूनतम वेतन पर नियम रिस्की सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य; केंद्रीय बोर्ड तय करेगा, राज्य अनुकूलित करेंगे
स्वास्थ्य जांच नियोजित स्वास्थ्य जांच अनिवार्य नहीं 40 साल से ऊपर के कर्मचारियों के लिए सालाना स्वास्थ्य जांच; खतरनाक उद्योगों में आन-साइट मॉनिटरिंग
समय पर वेतन कंपनियां समय पर वेतन देने में लापरवाह कंपनियों को हर महीने की 7 तारीख तक वेतन जमा अनिवार्य; देरी पर जुर्माना
महिला श्रमिक नाइट शिफ्ट और काम पर प्रतिबंध महिलाओं को रात्रि शिफ्ट (7 PM-6 AM) की अनुमति, लेकिन सुरक्षा गारंटी; समान वेतन और मातृत्व लाभ 26 सप्ताह
अपील और बोर्ड विखंडित अपील प्रक्रिया राष्ट्रीय OSH बोर्ड सभी सेक्टरों में एकसमान सुरक्षा मानदंड तय करेगा; सिंगल रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस

(स्रोत: श्रम मंत्रालय दिशा-निर्देश, 2025)

नए लेबर कोड की 12 प्रमुख बातें: श्रमिकों के लिए ‘बल्ले-बल्ले’, व्यवसायों के लिए ‘ईज’

ये कोड 1930-1950 के पुराने कानूनों की जगह लेंगे, जो आर्थिक विकास के लिए अप्रासंगिक हो चुके थे। यहां विस्तार से प्रमुख बदलाव:

  1. पुराने कानूनों का अंत: 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित कर चार संहिताएं। इससे कागजी कार्रवाई 90% कम होगी, और विवाद निपटारा तेज (दो सदस्यीय औद्योगिक ट्रिब्यूनल के साथ)।
  2. नियुक्ति पत्र अनिवार्य: हर कर्मचारी को जॉब शुरू होते ही अपॉइंटमेंट लेटर मिलेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, और कंपनियों की मनमानी (जैसे अचानक छंटनी) पर रोक लगेगी।
  3. न्यूनतम वेतन का विस्तार: सभी सेक्टरों (कृषि, गिग, प्लेटफॉर्म) में न्यूनतम वेतन लागू। केंद्रीय सलाहकार बोर्ड तय करेगा, राज्य अनुकूलित। उद्देश्य: कोई मजदूर भूखा न रहे।
  4. ग्रेच्युटी में राहत: फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयी (FTE) को 5 साल की बजाय सिर्फ 1 साल बाद ग्रेच्युटी का हक। कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स (देश के 60% श्रमिक) को बड़ा फायदा!
  5. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मान्यता: उबर, जोमैटो जैसे ऐप वर्कर्स को पहली बार परिभाषित। सामाजिक सुरक्षा (बीमा, पेंशन) और न्यूनतम आय सुनिश्चित। एग्रीगेटर्स को 1-2% टर्नओवर से योगदान।
  6. सामाजिक सुरक्षा का जाल: 40 करोड़ असंगठित मजदूरों (कृषि, निर्माण) को ESIC (स्वास्थ्य बीमा), EPF (भविष्य निधि) और पेंशन। गिग वर्कर्स को दुर्घटना कवर और मातृत्व लाभ।
  7. ओवरटाइम और कार्य घंटे: 8-9 घंटे से ज्यादा काम पर डबल वेतन। महिलाओं को रात्रि शिफ्ट की अनुमति, लेकिन सुरक्षित परिवहन अनिवार्य।
  8. स्वास्थ्य और सुरक्षा: 40+ उम्र के कर्मचारियों के लिए सालाना मेडिकल चेकअप। खतरनाक उद्योगों (खदान, केमिकल) में आन-साइट मॉनिटरिंग। 500+ कर्मचारियों वाली यूनिट्स में सुरक्षा समिति अनिवार्य।
  9. मीडिया और डिजिटल वर्कर्स कवर: पत्रकार, डबिंग आर्टिस्ट, स्टंटमैन और डिजिटल मीडिया कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा। वस्त्र, IT/ITeS, बंदरगाह श्रमिकों को समान लाभ।
  10. छुट्टी और बोनस: साल में 180 दिन काम करने पर सालाना छुट्टी। बोनस और अन्य लाभों को पारदर्शी बनाया गया।
  11. विवाद समाधान में तेजी: स्ट्राइक से पहले 14 दिन का नोटिस। सिंगल रिटर्न और लाइसेंस से छोटे व्यवसायों का बोझ कम। नेशनल OSH बोर्ड सेक्टर-विशिष्ट मानदंड तय करेगा।
  12. महिलाओं का सशक्तिकरण: समान वेतन (जेंडर पे गैप खत्म), 26 सप्ताह मातृत्व अवकाश। बागान मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों को विशेष सुरक्षा। इससे महिलाओं की कार्यबल भागीदारी 25% बढ़ सकती है।

MP News

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श्रम मंत्री मांडविया का बयान: “विकसित भारत का आधार”

श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा, “ये कोड श्रमिकों के कल्याण के लिए ऐतिहासिक हैं। न्यूनतम वेतन, नियुक्ति पत्र और सामाजिक सुरक्षा से कामगार सशक्त होंगे।” उन्होंने राज्यों से समन्वय की अपील की। हालांकि, ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी कि कॉन्ट्रैक्ट लेबर बढ़ सकता है, जिससे स्थायी नौकरियां कम हों।

ये सुधार भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे। लेकिन सफलता राज्यों के कार्यान्वयन पर निर्भर।


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