‘मकान संख्या 6 में 947 वोटर’ के दावे की सच्चाई ‘चुनाव आयोग ने एक घर में बसा दिया गाँव’ बिहार SIR पर झूठ फैलाते पकड़ा गया कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम
Bihar SIR Controversy | बिहार में विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कॉन्ग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ द्वारा बार-बार ‘वोट चोरी’ और ‘लोकतंत्र की लूट’ जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। हाल ही में कॉन्ग्रेस ने बोधगया के बाराचट्टी विधानसभा क्षेत्र के निदानी गाँव के बूथ नंबर 161 को लेकर सनसनीखेज दावा किया कि वहाँ की मतदाता सूची में सभी 947 मतदाताओं को एक ही मकान नंबर ‘6’ में दर्ज किया गया है। कॉन्ग्रेस ने इसे चुनाव आयोग की साजिश और मतदाता सूची में धांधली का सबूत बताते हुए कई सवाल उठाए। लेकिन, गया के जिलाधिकारी और चुनाव आयोग ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। आइए जानते हैं इस विवाद की पूरी सच्चाई और ‘Notional House Number’ के पीछे का तथ्य। Bihar SIR Controversy
कॉन्ग्रेस का दावा: एक घर में बसा पूरा गाँव?
कॉन्ग्रेस ने बिहार के बोधगया विधानसभा क्षेत्र के निदानी गाँव (बूथ नंबर 161) की मतदाता सूची को लेकर दावा किया कि सभी 947 मतदाताओं को एक ही मकान नंबर ‘6’ में दर्ज किया गया है। पार्टी ने इसे ‘वोट चोरी’ और ‘लोकतंत्र की लूट’ का सबूत बताते हुए कहा कि निदानी गाँव में सैकड़ों घर और परिवार होने के बावजूद, मतदाता सूची में पूरा गाँव एक काल्पनिक मकान में समा गया। कॉन्ग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तीन सवाल उठाए:
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बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने किस तरह का डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन किया?
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असली मकान नंबर को मतदाता सूची से क्यों हटाया गया?
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इस गड़बड़ी का फायदा किसे पहुँचाया जा रहा है?
कॉन्ग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि मकान नंबर हटाने से फर्जी वोटर, डुप्लीकेट नाम, और भूतिया पहचान छिपाना आसान हो जाता है। पार्टी ने इसे बिहार में चुनाव आयोग द्वारा ‘जबरदस्त वोट चोरी’ का सबूत बताया। इस दावे को कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने जोर-शोर से प्रचारित किया, खासकर तब जब ‘इंडिया’ गठबंधन बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाल रहा है।
बिहार SIR का ड्राफ्ट डाटा: क्या है हकीकत?
चुनाव आयोग ने बिहार SIR के तहत जो ड्राफ्ट मतदाता सूची अपलोड की है, उसमें निदानी गाँव के बूथ नंबर 161 का डाटा शामिल है। इस सूची में 947 मतदाता दर्ज हैं, जिनमें 526 पुरुष और 421 महिलाएँ हैं। यह सही है कि सभी मतदाताओं के पते में मकान नंबर ‘6’ दर्ज है। लेकिन, क्या यह वाकई में धांधली का सबूत है?
गया जिलाधिकारी और चुनाव आयोग का जवाब
गया के जिलाधिकारी ने कॉन्ग्रेस के दावे का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि निदानी गाँव में कई घरों में स्थायी मकान नंबर आवंटित नहीं हैं। ऐसी स्थिति में मतदाता सूची में ‘Notional House Number’ (प्रतीकात्मक मकान संख्या) का उपयोग किया जाता है। जिलाधिकारी ने एक एक्स पोस्ट में लिखा:
“कई गाँवों में गृह संख्या आवंटित नहीं होती है, जिसके कारण वोटर रोल में सांकेतिक गृह संख्या दी जाती है। जिन मतदाताओं का उल्लेख किया गया है, वे सभी गाँव में मौजूद हैं और सही वोटर हैं। निदानी गाँव के बूथ नंबर 161 के मतदाता स्वयं स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।”
जिलाधिकारी ने इस दावे को और मजबूत करने के लिए गाँव के मतदाताओं का एक वीडियो भी साझा किया। इस वीडियो में स्थानीय मतदाता बताते हैं कि वे SIR प्रक्रिया से संतुष्ट हैं और उन्हें कोई परेशानी नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गाँव में घरों को मकान नंबर देने की प्रथा नहीं है, और कॉन्ग्रेस द्वारा फैलाई जा रही अफवाहें पूरी तरह झूठी हैं।
चुनाव आयोग ने भी इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि Notional House Number एक प्रतीकात्मक संख्या है, जो तब उपयोग की जाती है जब किसी मतदाता के निवास स्थान पर वास्तविक मकान नंबर उपलब्ध नहीं होता। ग्रामीण क्षेत्रों, झुग्गी-झोपड़ियों, या अस्थायी बस्तियों में अक्सर घरों पर कोई स्थायी नंबर नहीं होता। ऐसे में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) भौतिक सत्यापन के दौरान प्रत्येक घर को एक क्रमांक (जैसे 1, 2, 3, या 6) प्रदान करता है। यह संख्या केवल मतदाता सूची को व्यवस्थित और क्रमबद्ध करने के लिए होती है, न कि किसी धांधली का हिस्सा।
पहले भी मकान नंबर ‘0’ पर फैलाया था झूठ
यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने इस तरह का दावा किया हो। इससे पहले कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र में मकान नंबर ‘0’ को लेकर भी कॉन्ग्रेस ने विवाद खड़ा किया था। राहुल गांधी ने दावा किया था कि मकान नंबर ‘0’ वाले मतदाता ‘फर्जी’ हैं और उनका कोई पता नहीं है। लेकिन, चुनाव आयोग ने इसे खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि बेघर लोगों या अस्थायी निवास वालों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए ऐसी प्रतीकात्मक संख्याएँ दी जाती हैं।
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बिहार SIR और कॉन्ग्रेस का प्रोपेगेंडा
बिहार में SIR प्रक्रिया 24 जून 2025 से शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करना है। इसके तहत 80% से अधिक मतदाताओं ने अपने दस्तावेज (नाम, पता, जन्मतिथि, आधार नंबर, वोटर आईडी) जमा कर दिए हैं। ड्राफ्ट सूची 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित होगी, और अंतिम सूची 30 सितंबर 2025 को जारी होगी।
कॉन्ग्रेस और विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को ‘वोट चोरी’ और ‘लोकतंत्र पर हमला’ करार दिया है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं ने SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए और सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की। लेकिन, चुनाव आयोग ने बार-बार स्पष्ट किया कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और सटीक बनाना है, न कि किसी विशेष दल को लाभ पहुँचाना। Bihar SIR Controversy
कॉन्ग्रेस का ‘मकान नंबर 6 में 947 वोटर’ का दावा भ्रामकऔरतथ्यहीन साबित हुआ है। निदानी गाँव में मकान नंबर ‘6’ एक प्रतीकात्मक संख्या है, जिसका उपयोग मतदाता सूची को व्यवस्थित करने के लिए किया गया। गया के जिलाधिकारी और स्थानीयमतदाताओं ने इसकी पुष्टि की है, और चुनाव आयोग ने भी Notional House Number की प्रक्रिया को स्पष्ट किया है। यह मामलाकॉन्ग्रेस के बार-बार भ्रामक दावों और प्रोपेगेंडा का एक और उदाहरण है, जिसका उद्देश्य SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना है। Bihar SIR Controversy
मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।