संवाददाता | अक्षय राठौर
सुसनेर में इन दिनों बोर्ड परीक्षाओं का दौर चल रहा है और परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्था, कक्ष निरीक्षण, गोपनीय कार्य तथा मूल्यांकन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शिक्षकों के कंधों पर हैं। ऐसे संवेदनशील समय में शिक्षा विभाग द्वारा हेल्थ केयर कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित किए जाने से नई चर्चा शुरू हो गई है। बोर्ड परीक्षा के बीच हेल्थ केयर प्रशिक्षण को लेकर शिक्षक वर्ग में असमंजस और चिंता दोनों दिखाई दे रहे हैं।
दोहरी जिम्मेदारी से बढ़ा दबाव
जानकारी के अनुसार जिन शिक्षकों को हेल्थ केयर कार्यक्रम में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वही शिक्षक बोर्ड परीक्षाओं में ड्यूटी भी निभा रहे हैं। बोर्ड परीक्षा के बीच हेल्थ केयर प्रशिक्षण के कारण शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ना स्वाभाविक है। परीक्षा प्रक्रिया बेहद संवेदनशील मानी जाती है, जहां छोटी सी चूक भी बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है। लगातार ड्यूटी और प्रशिक्षण से थकान बढ़ने की आशंका है, जिसका असर परीक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
समय चयन पर उठे प्रश्न
स्थानीय शिक्षकों का मानना है कि हेल्थ केयर प्रशिक्षण आवश्यक और उपयोगी पहल है, लेकिन इसका समय परीक्षा सत्र के बाद तय किया जाता तो अधिक व्यावहारिक रहता। इससे परीक्षा की पारदर्शिता और प्रशिक्षण की गुणवत्ता दोनों बेहतर रह सकती थीं। शिवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर बैठक आयोजित किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग बोर्ड परीक्षा के बीच हेल्थ केयर प्रशिक्षण के मुद्दे पर पुनर्विचार करता है या शिक्षकों को इसी दोहरी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा।








