CBSE पेपर सेट कठिनाई विवाद को लेकर देशभर में नई बहस छिड़ गई है। आरोप है कि अलग-अलग प्रश्नपत्र सेटों की कठिनाई का स्तर समान नहीं रखा गया, जिससे कुछ छात्रों को आसान और कुछ को बेहद कठिन पेपर मिला। इसी मुद्दे पर शिक्षक प्रशांत किराड़ ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के खिलाफ जनहित याचिका (PIL) दायर करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि परीक्षा की कठिनाई “किस्मत और क्षेत्र” पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
प्रशांत किराड़ ने एक वायरल वीडियो में दावा किया कि पहले कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में अलग-अलग सेटों की कठिनाई में बड़ा अंतर देखा गया। अब यही स्थिति कक्षा 12 की भौतिकी परीक्षा में भी सामने आई है। उनके अनुसार, कुछ सेट इतने कठिन थे कि उनमें जेईई मेन और एडवांस स्तर के प्रश्न पूछे गए, जबकि अन्य सेट अपेक्षाकृत आसान थे।
छात्रों का कहना है कि कक्षा 10 गणित का पेपर अत्यधिक लंबा और कठिन था। कई छात्रों ने निराशा जताई और कम अंक आने या दोबारा परीक्षा देने की आशंका व्यक्त की। वहीं कुछ छात्रों ने पेपर को मध्यम स्तर का भी बताया, जिससे विवाद और गहरा गया।
ग्रेस मार्क्स और पुनर्मूल्यांकन की मांग
CBSE पेपर सेट कठिनाई विवाद के बीच छात्र और अभिभावक ग्रेस मार्क्स या उदार मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं। कुछ लोग पुन: परीक्षा की भी मांग कर रहे हैं। प्रशांत किराड़ ने बोर्ड से आधिकारिक बयान जारी करने और कठिन सेट पाने वाले छात्रों को राहत देने की अपील की है।
उनका तर्क है कि वर्षों से कई सेट बनाए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार कठिनाई के स्तर में असामान्य अंतर देखने को मिला। सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में बड़ी संख्या में छात्र अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
इससे पहले भी कक्षा 10 की परीक्षा में अलग-अलग सेटों को लेकर विवाद सामने आया था। कुछ आसान प्रश्नपत्रों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जबकि अन्य छात्रों ने अपने सेट को अधिक कठिन बताया।
CBSE पेपर सेट कठिनाई विवाद ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और समानता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर बोर्ड की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी है।
read also पीएम मोदी का कांग्रेस पर तीखा हमला, गंदी और नंगी राजनीति से AI समिट को बदनाम किया










