छोटी-छोटी बातें भूलना नॉर्मल है या अल्जाइमर का संकेत? डॉक्टर ने बताया पहचान का आसान तरीका
Chhoti Baatein Bhoolna Normal Hai Ya Alzheimer Ka Sign | आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि कमरे में जाकर भूल गए कि क्या लेना था? या किसी परिचित का नाम याद न आए? चाबियां रखकर भूल जाना तो आम बात है। लेकिन जब ये छोटी-मोटी भूलें बार-बार हों, तो सवाल उठता है – क्या यह सामान्य है या अल्जाइमर की शुरुआत? दोनों में अंतर समझना आसान है, बस कुछ खास संकेतों पर ध्यान दें।
क्यों भूलते हैं छोटी-छोटी बातें? (ये नॉर्मल है)
दिमाग सुपर कंप्यूटर है, लेकिन तनाव, थकान, नींद की कमी या मल्टीटास्किंग से ओवरलोड हो जाता है।
सामान्य भूल की पहचान:
- किसी का नाम या शब्द तुरंत न याद आए, लेकिन कुछ देर बाद याद आ जाए
- कभी-कभी चाबी, चश्मा मिसप्लेस करना
- फोन पर बात करने जैसा छोटा काम भूलना
- रोजमर्रा की जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ता
अल्जाइमर में भूलना अलग क्यों होता है?
अल्जाइमर कोई साधारण भूल नहीं, बल्कि दिमाग की प्रोग्रेसिव बीमारी है जो यादों और सोचने की शक्ति को धीरे-धीरे खत्म करती है।
अल्जाइमर के प्रमुख संकेत:
- बार-बार एक ही सवाल पूछना – जवाब मिलने के बाद भी कुछ देर में फिर वही सवाल
- रोजमर्रा के कामों में दिक्कत – खाना बनाना, बिल भरना, नहाना
- समय-जगह में कन्फ्यूजन – अपने मोहल्ले में रास्ता भटकना, दिन-तारीख भूलना
- चीजें गलत जगह रखना – चाबी फ्रिज में, पर्स बिस्तर के नीचे – और ढूंढने का तरीका भी याद न रहना
- बोलचाल में परेशानी – सही शब्द न मिलना, वाक्य अधूरे छोड़ना
- मूड में बदलाव – चिड़चिड़ापन, शक, उदासी, लोगों से दूरी
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सबसे बड़ा अंतर क्या है?
| सामान्य भूल | अल्जाइमर |
|---|---|
| बाद में याद आ जाती है | याद ही नहीं आती, जैसे मिट गई हो |
| कोई संकेत मिलने पर याद आता है | संकेत देने पर भी नहीं याद आता |
अल्जाइमर के अन्य लक्षण
- हाल की बातचीत या घटना पूरी तरह भूल जाना
- परिचित लोगों/जगहों को पहचानने में दिक्कत
- फैसले लेने में कमी (सर्दी में हल्के कपड़े पहनना)
- बैंक काम, नंबर याद रखने में लगातार परेशानी
- सोचने, बोलने, रीजनिंग में दिक्कत
- बैलेंस, बटन बंद करने जैसे कामों में परेशानी
कब हो जाएं सतर्क?
अगर आपके या परिवार के किसी सदस्य में ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- हाल की बातें पूरी तरह भूल जाना
- फैसले लेने में अजीब गलतियां
- रोज के कामों में बार-बार दिक्कत
समय पर पहचान = बीमारी के असर को कम करना संभव
डॉ. का सुझाव: “अगर भूलने की आदत जीवन में बाधा डालने लगे, तो इसे हल्के में न लें। न्यूरोलॉजिस्ट से जांच जरूरी है।”
आपकी याददाश्त आपकी सबसे कीमती संपत्ति है – इसे संभाल कर रखें।
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मैं इंदर सिंह चौधरी वर्ष 2005 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर (M.A.) किया है। वर्ष 2007 से 2012 तक मैं दैनिक भास्कर, उज्जैन में कार्यरत रहा, जहाँ पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2013 से 2023 तक मैंने अपना मीडिया हाउस ‘Hi Media’ संचालित किया, जो उज्जैन में एक विश्वसनीय नाम बना। डिजिटल पत्रकारिता के युग में, मैंने सितंबर 2023 में पुनः दैनिक भास्कर से जुड़ते हुए साथ ही https://mpnewsbrief.com/ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से मैं करेंट अफेयर्स, स्वास्थ्य, ज्योतिष, कृषि और धर्म जैसे विषयों पर सामग्री प्रकाशित करता हूं। फ़िलहाल मैं अकेले ही इस पोर्टल का संचालन कर रहा हूं, इसलिए सामग्री सीमित हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता।










