चिंतामन गणेश मंदिर जत्रा का पावन पर्व इस वर्ष 4 मार्च 2026 से उज्जैन में भक्ति और आस्था के साथ प्रारंभ होगा। चैत्र मास में इस बार पांच बुधवार का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसके कारण मंदिर में कुल पांच जत्राओं का आयोजन किया जाएगा। इसे लेकर मंदिर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं, ताकि देशभर से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन की व्यवस्था मिल सके। इस दौरान न केवल भक्त, बल्कि मालवा अंचल के किसान भी अपनी नई गेहूं की फसल का पहला अंश भगवान चिंतामन गणेश को अर्पित करने पहुंचेंगे, जिससे मंदिर परिसर में धार्मिक उत्सव जैसा वातावरण बन जाएगा।
चैत्र मास में गणेश आराधना का विशेष महत्व
चैत्र मास को भगवान गणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार, इस पूरे माह के प्रत्येक बुधवार को चिंतामन गणेश मंदिर में जत्रा आयोजित होती है। इस वर्ष पांच बुधवार होने से श्रद्धालुओं को पांच बार दर्शन और पुण्य लाभ का अवसर मिलेगा। मान्यता है कि चैत्र मास में भगवान चिंतामन गणेश के दर्शन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के कारण मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त उज्जैन पहुंचते हैं। मालवी बोली में इस धार्मिक आयोजन को ‘जत्रा’ कहा जाता है, जो समय के साथ एक महत्वपूर्ण लोकपर्व का स्वरूप ले चुका है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं
गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। श्रद्धालुओं को धूप से राहत देने के लिए खुले क्षेत्रों में शेड और शामियाने लगाए जाएंगे, वहीं गर्म जमीन से बचाव के लिए कारपेट भी बिछाए जाएंगे। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चिंतामन गणेश मंदिर जत्रा में आने वाले सभी भक्तों को सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन का अनुभव मिल सके।
किसानों की आस्था से जुड़ी अनोखी परंपरा
मालवा क्षेत्र में चैत्र मास का विशेष धार्मिक और कृषि महत्व है। इसी समय गेहूं की फसल तैयार होती है, और किसान परंपरा अनुसार अपनी नई उपज का पहला हिस्सा भगवान गणेश को अर्पित करते हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी बड़ी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। इस वर्ष भी हजारों किसान अपनी नई फसल लेकर मंदिर पहुंचेंगे, जिससे जत्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और अधिक बढ़ जाएगा।
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