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दिल्ली EV पॉलिसी 2026, अब सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर रजिस्ट्रेशन से बदलेगा शहर का ट्रांसपोर्ट

दिल्ली EV पॉलिसी 2026: अब सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर रजिस्ट्रेशन से बदलेगा शहर का ट्रांसपोर्ट
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दिल्ली EV पॉलिसी 2026 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसमें राजधानी के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में अहम कदम उठाए गए हैं। इस नई नीति के तहत सरकार ने प्रदूषण कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सख्त नियम प्रस्तावित किए हैं।

इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर अनिवार्य करने की तैयारी

इस ड्राफ्ट पॉलिसी के अनुसार, साल 2027 से दिल्ली में नए थ्री-व्हीलर (ऑटो रिक्शा) की रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के रूप में ही होगी। यानी पेट्रोल, डीजल या CNG से चलने वाले नए ऑटो की एंट्री पूरी तरह बंद करने की तैयारी है।

सरकार का मानना है कि थ्री-व्हीलर सेगमेंट शहर में प्रदूषण का बड़ा कारण है, इसलिए इसे सबसे पहले इलेक्ट्रिक में बदलना जरूरी है।

टू-व्हीलर पर भी सख्ती, 2028 से नया नियम

दिल्ली सरकार ने सिर्फ थ्री-व्हीलर ही नहीं, बल्कि टू-व्हीलर सेगमेंट में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। ड्राफ्ट के मुताबिक, साल 2028 से नए पेट्रोल टू-व्हीलर की रजिस्ट्रेशन पर रोक लग सकती है और केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर ही अनुमति पाएंगे।

यह कदम राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को कम करने की रणनीति का हिस्सा है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बड़े फायदे

नई नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई आकर्षक लाभ भी दिए गए हैं। इसमें रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट जैसे प्रावधान शामिल हैं, जिससे EV खरीदना सस्ता और आसान हो सके।

इसके अलावा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी स्वैपिंग सुविधाओं को भी तेजी से बढ़ाने पर जोर दिया गया है, ताकि लोगों को EV अपनाने में कोई परेशानी न हो।

क्यों जरूरी है यह नई EV पॉलिसी

दिल्ली में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुकी है और वाहनों से निकलने वाला धुआं इसका बड़ा कारण है। रिपोर्ट्स के अनुसार, शहर के कुल प्रदूषण में वाहनों का बड़ा योगदान है, इसलिए सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है।

इस पॉलिसी के लागू होने से न सिर्फ प्रदूषण कम होगा, बल्कि लोगों को साफ और सस्ता ट्रांसपोर्ट विकल्प भी मिलेगा।

कब लागू होगी नई नीति

फिलहाल यह पॉलिसी ड्राफ्ट स्टेज में है और सरकार ने जनता व विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं। सभी सुझावों के बाद इसमें बदलाव किए जा सकते हैं और फिर इसे लागू किया जाएगा।

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